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राजपाल यादव का वायरल वीडियो: “मैंने पैसे नहीं लिए…” – फिर भी तिहाड़ जेल क्यों?

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बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव इन दिनों कानूनी पचड़े में फंसे हुए हैं। चेक बाउंस केस के चलते वह इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं। इसी बीच उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पैसों के लेन-देन को लेकर अपनी सफाई देते नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला देसी अंदाज़ में।

राजपाल यादव का वायरल वीडियो क्या कहता है?

सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें राजपाल यादव से पूछा गया कि क्या उन्होंने फिल्म बनाने के लिए बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल से ₹5 करोड़ उधार लिए थे? इस पर राजपाल यादव ने साफ शब्दों में कहा – “मैंने पैसे नहीं लिए, उन्होंने खुद फिल्म में निवेश किया था। वो अपने पोते को हीरो बनाना चाहते थे।”

यह बयान उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान दिया था। अब यही वीडियो फिर से चर्चा में आ गया है और लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं।

फिल्म ‘आता पता लापता’ को लेकर क्या बोले राजपाल?

वीडियो में राजपाल यादव से यह भी पूछा गया कि क्या वह 2012 की फिल्म ‘आता पता लापता’ के डायरेक्टर थे? इस पर उन्होंने साफ कहा – “मैं न कभी डायरेक्टर था, न हूं और न कभी बनूंगा। मैं सिर्फ एक अभिनेता हूं।”

उन्होंने खुद को सिर्फ कलाकार बताया और फिल्म के डायरेक्शन से दूरी बनाई। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या पूछा?

12 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने राजपाल यादव से सवाल किया कि जब उन्होंने पहले खुद माना था कि ₹5 करोड़ का लोन लिया था, तो अब सजा रद्द करने की मांग क्यों कर रहे हैं?

कोर्ट में राजपाल यादव ने कहा कि उन्होंने गलती स्वीकार कर ली है और वह पैसा चुकाने को तैयार हैं। उनके वकील ने बताया कि अब तक करीब ₹3 करोड़ रुपये चुका भी दिए गए हैं।

फिर भी क्यों नहीं मिली जमानत?

इतनी दलीलों के बावजूद कोर्ट ने राजपाल यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि फिलहाल उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद उन्हें फिर से तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

अगली सुनवाई कब होगी?

अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026, सोमवार को होगी। उस दिन तय होगा कि राजपाल यादव को जमानत मिलती है या नहीं।फिलहाल उनके फैंस दुआ कर रहे हैं कि जल्द ही ये हंसी का बादशाह कानूनी झंझट से बाहर आए। लेकिन मामला गंभीर है और फैसला कोर्ट के हाथ में है।

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