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आमला। इतिहास में पहली बार ‘मौन’ हुआ विपक्ष, मलाईदार पदों के मोह में डूबा शहर का भविष्य; 18 वार्डों में हाहाकार

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खबरवाणी

आमला। इतिहास में पहली बार ‘मौन’ हुआ विपक्ष, मलाईदार पदों के मोह में डूबा शहर का भविष्य; 18 वार्डों में हाहाकार

आमला । कहावत है पूत के पांव पालने में दिखते हैं, और इसका मतलब ये है कि किसी भी घटनाक्रम की शुरुआत में ही उसके परिणाम के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कुछ ऐसा ही अब नगर पालिका परिषद में दिखाई पड़ रहा है। बीते 4 वर्ष पहले जब यहां नगर पालिका परिषद का गठन हो रहा था, और भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल भी था, उसके बाद भी यहां कांग्रेस ने अपनी सरकार बना ली थी, उस समय से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अब अगले 5 वर्षों तक शहर को कुछ भी नहीं मिलने वाला है, और लगभग हुआ भी कुछ ऐसा ही जिम्मेदारों की अदूरदर्शिता स्वार्थ और आलसीपन के चलते पूरे शहर में जगह-जगह समस्याओं के अंबार लग गए हैं। गैरअसरदार परिषद के चलते नपा में आमजनों की सुनवाई तक नहीं हो पा रही है। मसला चाहे सड़क का हो, नाली का हो, पानी का हो, सफाई का या फिर स्ट्रीट लाइट, यातायात व्यवस्था की बात हो या फिर आवारा जानवरों से शहर में बढ़ रही दुर्घटनाओं की बात हो लगभग तमाम मामलों में जनहित के मुद्दे कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। शहर के लगभग सभी वार्डों में हमारे द्वारा लोगों से की गई चर्चा के अनुसार अबकी बार परिषद कागजों और पोस्टर बैनर में ही दिखाई पड़ रही है, जैसा कि लोगों ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद में जनता की कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे लोगों में नाराजी पनप रही है।

लोगों ने कहा किसे बताएं और कितनी बार

इस मौके पर यूं तो सभी 18 वार्डों में हमारी सैकड़ो लोगों से बात हुई है, इस दौरान पूरे शहर में हमें ऐसा कोई भी वार्ड नहीं मिला है, जहां लोग परिषद की कार्यशैली से नाराज ना हो।कहीं सड़क, कहीं नाली, कहीं बिजली के पोल, पुलिया,गलियों में अतिक्रमण पेयजल, सफाई के साथ-साथ आवारा जानवरों की विकराल होती समस्याएं और इससे हो रही दुर्घटनाएं भी शामिल है इस मौके पर शहर के रिकेश भिखोंडे,मालती, सुरेखा, कृष्णा, मुकेश मोरे, मंगल मोरे,मोना राठौर, गंगाबाई, चंपाबाई, संध्या देवी, नुसरत जहां, इसराइल शाह, परवेज खान, ममता यादव,राजा सोनी, हितेश सोनी, असलम मिर्ची अब्बू शाह गंगा पवार, अनुपम ठाकुर,मयंक देशमुख, जयंत पवार, सलीम जावेद, मोनिका शर्मा, सचिन और न जाने ऐसे कितने ही लोगों ने हमें शहर की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराते हुए कहा है कि कुछ समस्याएं तो चलती रहती है किंतु जब पूरी तरह शहर ठप्प होने लगे और जनता की सुनवाई भी बंद हो जाए, तो अपना दुखड़ा आखिर कहां जाकर रोए।इस दौरान हमें शहर के कई ऐसे इलाके भी मिले हैं, जहां अभी तक सड़क बिजली नाली और पानी की सुविधा भी प्रशासन मुहैय्या नहीं करा पाया है। इन लोगों का आरोप है कि आखिर कितनी बार इलाके की समस्याएं प्रशासन और परिषद को बताएं।

ज्यादातर पार्षद अपने कार्यकाल से नाराज और दुखी

इस मौके पर हमने शहर के पार्षद काशीबाई, नीलम साहू,पद्मिनी भूमरकर, सुधा नारे, खुशबू अतुलकर, सुधीर अम्बेडकर, राकेश शर्मा से बात की तो इन सभी लोगों का कहना था कि वह अपनी परिषद से बेहद नाराज और दुखी भी है, क्योंकि यह सभी अपने तमाम प्रयासों के बाद भी अपने वार्ड के लिए कुछ ऐसा खास नहीं कर पाए, जैसा कि उन्होंने लक्ष्य बनाया था।

सरेंडर हुई भाजपा 4 वर्ष बीतने के बाद भी परिषद में नेता प्रतिपक्ष नहीं बना पाई, सवालों में संगठन

भले ही प्रदेश और देश में भाजपा का शासन चल रहा हो, किंतु आमला नगर परिषद में बीते समय नगर परिषद के चुनाव में पर्याप्त संख्या बल के बाद भी यहां सरेंडर हुई भाजपा अपनी सरकार भी नहीं बना पाई थी, और अब लगभग 4 वर्ष से ज्यादा का समय गुजर जाने के बाद भी यहां भाजपा संगठन परिषद में अपना नेता प्रतिपक्ष भी नहीं दे पाई है,जो संगठन के अंदर के घमासान और मतभेदों से इनकार नहीं कर सकता है। बहरहाल जो भी हो
किंतु आमला नगर परिषद में पक्ष विपक्ष के बीच की कम हुई दूरियों और प्रतिपक्ष की कमी के चलते आम जनता की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है।
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