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आस्था नहीं, व्यवस्था पर सवाल
छोटा महादेव भोपाली में महाशिवरात्रि के अवसर पर गुफा तक प्रत्यक्ष दर्शन पर लगाया गया प्रतिबंध इस वर्ष भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रशासन का तर्क है कि पहाड़ी क्षेत्र में दरार बढ़ने की आशंका है और अत्यधिक भीड़ के दौरान संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए एहतियातन यह कदम उठाया जाता है। सुरक्षा निस्संदेह सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, इस पर कोई मतभेद नहीं।
लेकिन प्रश्न प्रतिबंध से अधिक उसकी निरंतरता और तर्कसंगतता का है। यदि दरार वास्तव में गंभीर और संरचनात्मक खतरे का संकेत है, तो क्या यह जोखिम केवल महाशिवरात्रि के दो दिनों तक सीमित रहता है? वर्ष के शेष दिनों में श्रद्धालुओं का गुफा तक पहुँचना सामान्य रूप से जारी रहता है। ऐसे में या तो खतरा स्थायी है—तो सुरक्षा प्रावधान भी स्थायी और वर्षभर समान होने चाहिए—या फिर खतरे का आकलन स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पिछले कई वर्षों से प्रतिबंध लगाया जा रहा है, किंतु स्थायी समाधान की दिशा में ठोस, वैज्ञानिक और पारदर्शी पहल का स्पष्ट ब्यौरा सामने नहीं आया। क्या भू-तकनीकी सर्वेक्षण हुआ? क्या विशेषज्ञों ने पहाड़ी की स्थिरता पर विस्तृत रिपोर्ट दी? यदि दी, तो उसे सार्वजनिक करने में संकोच क्यों? और यदि अब तक व्यापक तकनीकी हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो केवल प्रतिबंध को ही समाधान मान लेना दूरदर्शिता नहीं कहा जा सकता।
धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन चुनौती अवश्य है, परंतु यही प्रशासनिक क्षमता की कसौटी भी है। देश के अनेक प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सीमित संख्या में प्रवेश, समयबद्ध स्लॉट, सुदृढ़ बैरिकेडिंग, सुरक्षा जाल और विशेषज्ञ निगरानी जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से जोखिम को नियंत्रित किया जाता है। पूर्ण प्रतिबंध अक्सर अंतिम विकल्प होना चाहिए, पहला नहीं।
यह विषय आस्था बनाम प्रशासन का नहीं है। यह प्रश्न जवाबदेही, पारदर्शिता और दीर्घकालिक योजना का है। जनता स्पष्टता चाहती है—या तो वैज्ञानिक आधार पर जोखिम का प्रमाण सामने आए, या फिर संतुलित और नियंत्रित व्यवस्था के साथ प्रत्यक्ष दर्शन की योजना बने।
सुरक्षा के नाम पर निर्णय लेना आवश्यक है, परंतु सुरक्षा की आड़ में व्यवस्थागत कमियों को छिपाया नहीं जा सकता। यदि खतरा वास्तविक है तो समाधान भी वास्तविक और स्थायी होना चाहिए। और यदि समाधान संभव है, तो प्रतिबंध के बजाय प्रबंधन की दक्षता दिखाई जानी चाहिए।
अंततः, भरोसा केवल आदेशों से नहीं, पारदर्शी निर्णयों और ठोस कार्यवाही से बनता है। छोटा महादेव भोपाली के संदर्भ में भी यही अपेक्षा है—सुरक्षा सुनिश्चित हो, पर स्पष्टता के साथ।
प्रशासन का पक्ष:
अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) शाहपुर श्री प्रपंज आर ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पिछले दो वर्षों से महाशिवरात्रि के दौरान गुफा तक प्रत्यक्ष दर्शन पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। स्थल का मौके पर निरीक्षण करने के बाद ही यह निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र की स्थिति और भीड़ के दबाव को ध्यान में रखते हुए एहतियातन कदम उठाना आवश्यक समझा गया है। प्रशासन का उद्देश्य मेले का संचालन सुरक्षा नीति के अनुरूप सुनिश्चित करना है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे।




