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बंद पड़ी बड़ी सहकारी सूत मिल परिसर में कथित अवैध मुरूम उत्खनन, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

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खबरवाणी

बंद पड़ी बड़ी सहकारी सूत मिल परिसर में कथित अवैध मुरूम उत्खनन, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

दिनदहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से परिवहन, विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

बुरहानपुर जिले में खनिज निगरानी को चुनौती देता एक गंभीर मामला सामने आया है। शहर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित वर्षों से बंद पड़ी बड़ी सहकारी सूत मिल के परिसर में कथित तौर पर मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन किए जाने का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें जेसीबी मशीन से खुदाई और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से मुरूम का परिवहन होते स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
यह गतिविधि दिन के उजाले में धड़ल्ले से जारी है, इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर माफिया तत्वों को इतनी हिम्मत कहां से मिल रही है।
वर्षों से बंद मिल, फिर भी हलचल से चौंके लोग
बड़ी सहकारी सूत मिल पिछले कई वर्षों से बंद पड़ी है। न तो वहां उत्पादन होता है और न ही नियमित गतिविधियां। ऐसे में अचानक मिल परिसर में भारी मशीनरी की आवाज़, जेसीबी की खुदाई और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही ने आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों का ध्यान खींचा।
“मिल बंद है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वहां लगातार जेसीबी और ट्रैक्टर दिखाई दे रहे हैं। पहले लगा कोई सरकारी काम होगा, लेकिन जब मुरूम भरकर ट्रैक्टर बाहर जाते दिखे, तब शक गहराया।”
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बने सबूत?
इस पूरे मामले को तूल तब मिला जब कथित उत्खनन के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने लगे। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह जेसीबी मशीन से जमीन की खुदाई की जा रही है और मुरूम को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ले जाया जा रहा है।
वीडियो के वायरल होने के बाद कई सवाल खड़े कर रही है।
खनिज नियमों का उल्लंघन होने की आशंका
खनिज विशेषज्ञों के अनुसार, मुरूम एक लघु खनिज की श्रेणी में आता है और इसके उत्खनन व परिवहन के लिए खनिज विभाग से अनुमति और वैध रॉयल्टी आवश्यक होती है। बिना अनुमति किए गए उत्खनन को अवैध खनन की श्रेणी में रखा जाता है, जिस पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
न तो उत्खनन स्थल पर कोई सूचना बोर्ड लगा है
न ही परिवहन कर रहे वाहनों पर वैध रॉयल्टी पर्ची दिखाई देती है
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
संबंधित विभाग बेखबर या मौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिनदहाड़े चल रही इस कथित अवैध गतिविधि की जानकारी संबंधित विभागों को क्यों नहीं है?
खनिज विभाग, राजस्व विभाग भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि,
“अगर आम आदमी बिना अनुमति एक ट्रॉली मिट्टी भी उठाए तो तुरंत कार्रवाई होती है, फिर यहां इतने बड़े स्तर पर हो रही गतिविधि पर चुप्पी क्यों?”
“इतनी हिम्मत आती कहां से?” – जनता में आक्रोश
क्षेत्र के लोगों में इस पूरे मामले को लेकर गहरा आक्रोश है। न तो प्रशासन का डर है और न ही कानून का।
जनचर्चा में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या इन्हें किसी तरह का संरक्षण प्राप्त है? या फिर निगरानी तंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका है।
कड़ी कार्रवाई से ही टूटेगी हिम्मत
सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए
यदि अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है तो
जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त किया जाए
जिम्मेदार लोगों पर खनिज अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई हो
संबंधित विभागों की लापरवाही की भी जांच हो
लोगों का मानना है कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे माफियाओं के हौसले बुलंद रहेंगे।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक इस मामले में जिला प्रशासन या खनिज विभाग की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो से कब तक हरकत में आता है विभाग और क्या सच में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाता है या मामला फाइलों में ही सिमट कर रह जाता है।

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