रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, देश की सुरक्षा को मजबूती
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में इस बार बड़ी छलांग लगाई है। कुल रक्षा बजट को बढ़ाकर ₹7.84 लाख करोड़ कर दिया गया है, जो पिछले साल के ₹6.81 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। यह बजट देश की सुरक्षा जरूरतों और बदलते वैश्विक हालात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। रक्षा बजट अब भारत के GDP का 1.99 प्रतिशत हो गया है, जो यह दिखाता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दे रही है।
सैनिकों की सैलरी पर कितना खर्च? सेना, नौसेना और वायुसेना का हिसाब
रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा सैनिकों की सैलरी और भत्तों पर खर्च होता है। आने वाले वित्त वर्ष में ₹1.18 लाख करोड़ सिर्फ भारतीय सेना के वेतन और भत्तों के लिए रखे गए हैं। वहीं, भारतीय वायुसेना को ₹20,536 करोड़ और भारतीय नौसेना को ₹9,662.50 करोड़ सैलरी व अलाउंस के लिए दिए गए हैं। इसके अलावा पेंशन बिल ₹1.71 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो यह बताता है कि रिटायर्ड जवानों की जिम्मेदारी भी सरकार गंभीरता से निभा रही है।
सेना का आधुनिकीकरण सबसे बड़ा फोकस
इस बजट की सबसे बड़ी खासियत है सेना का आधुनिकीकरण। इसके लिए सरकार ने ₹1.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 24 प्रतिशत ज्यादा है। इसका सीधा मतलब है – नए हथियार, आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा सिस्टम और भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार फौज।
राफेल से लेकर एयरक्राफ्ट इंजन तक, वायुसेना को बड़ी सौगात
एयरक्राफ्ट और एयरो इंजन के लिए इस बार ₹63,733.94 करोड़ का बजट रखा गया है। इसमें 114 राफेल फाइटर जेट्स की डील भी शामिल मानी जा रही है, जो भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएगी। इससे पहले यह बजट ₹48,614 करोड़ था, जो अब साफ तौर पर बढ़ाया गया है।
रिसर्च, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशन सिंदूर का असर
रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए बजट को बढ़ाकर ₹17,250 करोड़ कर दिया गया है। एक रिटायर्ड आर्मी जनरल के मुताबिक, यह बजट ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। देसी टेक्नोलॉजी, स्वदेशी हथियार और आत्मनिर्भर भारत की सोच इस बजट में साफ झलकती है।
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