Terrorist Organizations Rules: दुनिया भर में जब कोई संगठन या समूह हिंसा, आतंक, मानवाधिकार उल्लंघन या सरकार विरोधी सशस्त्र गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे आतंकी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू होती है। हाल ही में यूरोपीय यूनियन (EU) ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित किया है। यह फैसला ईरान में प्रदर्शनकारियों पर की गई सख्त कार्रवाई के बाद लिया गया।
अमेरिका में आतंकी घोषित करने के नियम
अमेरिका में किसी देश, संगठन या व्यक्ति को आतंकी घोषित करने के लिए “State Sponsor of Terrorism” कानून लागू है। इसके तहत अगर कोई देश आतंकवाद को समर्थन देता है, फंडिंग करता है या हथियार मुहैया कराता है, तो उसे आतंकी राज्य घोषित किया जा सकता है। अमेरिका अब तक ईरान, सीरिया, क्यूबा और उत्तर कोरिया को इस सूची में शामिल कर चुका है। ऐसे देशों पर आर्थिक प्रतिबंध, हथियारों की खरीद-फरोख्त पर रोक और व्यापार सीमाएं लगा दी जाती हैं।
भारत में आतंकी संगठन घोषित करने की प्रक्रिया
भारत किसी देश को आतंकी घोषित नहीं करता, लेकिन संगठनों और व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई करता है। इसके लिए भारत में UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम लागू है। इस कानून के तहत केंद्र सरकार किसी भी संगठन को आतंकी घोषित कर सकती है। फरवरी 2021 तक भारत ने 42 संगठनों को आतंकी सूची में डाला है, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, अल-कायदा और इंडियन मुजाहिदीन जैसे नाम शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र कैसे करता है आतंकी संगठन तय
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी किसी संगठन या व्यक्ति को आतंकी घोषित कर सकती है। इसके लिए UN की 1267, 1989 और 2253 समितियां काम करती हैं। कोई भी सदस्य देश इन समितियों के सामने प्रस्ताव रख सकता है। सबूतों की जांच, सदस्य देशों की सहमति और विस्तृत समीक्षा के बाद ही किसी नाम को आतंकी सूची में जोड़ा जाता है। इसके बाद संपत्ति फ्रीज, यात्रा प्रतिबंध और हथियारों पर रोक लगाई जाती है।
आतंकी घोषित होने के बाद क्या असर पड़ता है
जब किसी संगठन या व्यक्ति को आतंकी घोषित किया जाता है, तो उसकी संपत्तियां जब्त हो सकती हैं, बैंक खाते सील होते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाजाही पर रोक लगती है। फंडिंग बंद हो जाती है और वैश्विक निगरानी बढ़ जाती है। यही कारण है कि किसी संगठन को आतंकी घोषित करना सिर्फ एक राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर फैसला होता है।




