Kaalchakra: कई लोग रोज पूजा पाठ करते हैं, भगवान का नाम लेते हैं, व्रत रखते हैं, फिर भी जीवन में परेशानियां कम होने का नाम नहीं लेतीं। ऐसे में मन में सवाल आता है कि क्या कहीं भगवान नाराज तो नहीं हैं। प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार कई बार पूजा के दौरान की गई छोटी छोटी गलतियां ही इसका कारण बन जाती हैं। अनजाने में हुई ये भूलें पूजा का पूरा फल नहीं मिलने देतीं और जीवन में रुकावटें बनी रहती हैं।
पूजा घर से जुड़ी जरूरी सावधानियां
घर के मंदिर में देवी देवताओं की सही व्यवस्था बहुत जरूरी मानी जाती है। पंडित सुरेश पांडेय बताते हैं कि घर में गणेश जी, शिव जी, विष्णु जी, सूर्य देव और माता दुर्गा की पूजा नियमित रूप से करनी चाहिए। मंदिर में दो से ज्यादा शिवलिंग नहीं रखने चाहिए। इसी तरह तीन गणेश प्रतिमा रखना भी अशुभ माना जाता है। माता दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की एक एक मूर्ति रखी जा सकती है, लेकिन ज्यादा भीड़ नहीं होनी चाहिए। शालिग्राम जितना छोटा हो, उतना ही अधिक पुण्य फल देता है।
पूजा के समय की जाने वाली आम गलतियां
अक्सर लोग पूजा शुरू करने से पहले माथे पर तिलक नहीं लगाते या टूटे चावल का इस्तेमाल कर लेते हैं। यह पूजा की शुद्धता को प्रभावित करता है। पूजा से पहले कुमकुम का तिलक जरूर लगाना चाहिए। चावल हमेशा साबुत और साफ होने चाहिए। देवताओं को अक्षत तीन बार चढ़ाने का विधान है, जबकि पितरों को एक बार ही चढ़ाना चाहिए। इन नियमों का ध्यान न रखने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
भोग और पूजन सामग्री में बरतें सावधानी
पूजा में इस्तेमाल होने वाले जल, दूध, दही या घी में उंगली डालना वर्जित माना गया है। इससे सामग्री अशुद्ध हो जाती है। साथ ही दूध, दही या पंचामृत को तांबे के बर्तन में नहीं रखना चाहिए। भगवान को भोग हमेशा साफ सुथरे और पवित्र बर्तन में ही अर्पित करें। लोहे के बर्तन में भोग चढ़ाना अशुभ माना गया है और इससे पूजा का फल नहीं मिलता।
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पूजा के बाद क्या करें ताकि मिले पूरा फल
पूजा समाप्त होने के बाद आचमन करना बेहद जरूरी होता है। पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार तीन बार आचमन करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है। इससे मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं। पूजा के बाद कुछ समय शांत बैठकर भगवान का ध्यान करना भी लाभकारी होता है। अगर इन नियमों का पालन श्रद्धा और नियम से किया जाए, तो देवताओं की कृपा जरूर मिलती है और जीवन की परेशानियां धीरे धीरे कम होने लगती हैं।





