Budget 2026: भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले MSME सेक्टर की निगाहें अब 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं। छोटे उद्योग, स्टार्टअप और कुटीर व्यवसाय इस बार बजट से बड़े ऐलान की उम्मीद कर रहे हैं। NeoInsights की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 86% MSME को भरोसा है कि Budget 2026 उनके कारोबार को नई रफ्तार देगा।
GST सुधार और GST 2.0 की मांग
MSME सेक्टर की सबसे बड़ी मांग है GST सिस्टम को आसान बनाना। छोटे कारोबारी चाहते हैं कि रिटर्न फाइलिंग सरल हो, ताकि कागजी झंझट कम हो और समय बचे।
इसके अलावा, कर्मचारी हेल्थ इंश्योरेंस पर दिए गए GST का Input Tax Credit (ITC) मिलने की भी मांग है, जिससे खर्च घट सके।
MSME संगठन यह भी चाहते हैं कि एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बने, जिससे एक्सपोर्ट और ITC रिफंड समय पर मिल सके।
सस्ते लोन और वर्किंग कैपिटल की जरूरत
छोटे कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत होती है वर्किंग कैपिटल। इस बजट में MSME सेक्टर चाहता है कि:
- Interest Equalization Scheme का दायरा बढ़ाया जाए
- CGTMSE योजना की लिमिट ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10–20 करोड़ की जाए
इसके साथ ही MSMEs की मांग है कि सरकार और बड़े PSU को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य किया जाए, ताकि नकदी की समस्या न हो।
डिजिटल MSME फंड और टेक्नोलॉजी सपोर्ट
Budget 2026 में सरकार से उम्मीद है कि वह ₹10,000–15,000 करोड़ का ‘Digital MSME Fund’ शुरू करे। इससे छोटे उद्योगों को:
- ऑटोमेशन
- डिजिटल टूल्स
- AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद मिलेगी
डिजिटल बनने से MSME की प्रोडक्टिविटी और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं।
ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और सोलर पर फोकस
अब MSME सेक्टर भी ग्रीन और सस्टेनेबल बिजनेस की ओर बढ़ना चाहता है। इस बजट में मांग है कि:
- रूफटॉप सोलर पर 100% डिप्रिसिएशन मिले
- ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग के लिए कम ब्याज दर पर लोन दिया जाए
इससे बिजली का खर्च घटेगा और पर्यावरण को भी फायदा होगा।
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एक्सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट
MSME एक्सपोर्टर्स चाहते हैं कि Tier-2 और Tier-3 शहरों में:
- नए MSME क्लस्टर
- टेस्टिंग लैब्स
- और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिले
इसके अलावा, ई-कॉमर्स के जरिए विदेशों में सामान भेजने वाले छोटे व्यापारियों के लिए नियम आसान और लॉजिस्टिक लागत कम करने की भी मांग है।





