Rail Budget 2026: भारतीय रेलवे सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। करोड़ों लोगों को रोजगार देने वाली भारतीय रेलवे का बजट भी हमेशा से चर्चा में रहा है। आज जब रेल बजट 2026 की बातें हो रही हैं, तो आइए जानते हैं कि भारत का पहला रेल बजट कब, किसने और किन हालात में पेश किया था।
रेल बजट की शुरुआत कब हुई
बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में रेल बजट की शुरुआत आज़ादी के बाद नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। पहले रेलवे का बजट आम बजट का ही हिस्सा हुआ करता था। लेकिन 1920-21 में बनी एकवर्थ कमेटी की सिफारिशों के बाद रेलवे को अलग बजट देने का फैसला लिया गया। इसके बाद साल 1924 में पहली बार अलग रेल बजट पेश किया गया।
पहला अलग रेल बजट किसने पेश किया
साल 1924 में भारत का पहला अलग रेल बजट ब्रिटिश अधिकारी सर चार्ल्स इनिस ने पेश किया था। उस समय रेलवे अंग्रेजी सरकार के अधीन था और बजट का मकसद रेलवे से ज्यादा से ज्यादा राजस्व जुटाना था। उस दौर में रेलवे का विस्तार तेजी से हो रहा था, लेकिन आम यात्रियों की सुविधाओं पर कम ध्यान दिया जाता था।
आज़ाद भारत का पहला रेल बजट
भारत को आज़ादी मिलने के बाद भी रेल बजट की परंपरा जारी रही। आज़ाद भारत का पहला रेल बजट 20 नवंबर 1947 को पेश किया गया। इसे देश के पहले रेल मंत्री जॉन मथाई ने संसद में रखा। उस समय रेलवे का कुल बजट सिर्फ 126.69 करोड़ रुपये था, जो आज के मुकाबले बेहद कम लगता है।
बंटवारे के बाद रेलवे की बड़ी चुनौती
1947 का रेल बजट बेहद चुनौतीपूर्ण हालात में आया था। देश के बंटवारे के बाद रेलवे नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ था। लाखों शरणार्थियों को पाकिस्तान से भारत लाने की जिम्मेदारी रेलवे पर थी। इस बजट का बड़ा हिस्सा रेलवे लाइनों की मरम्मत, डिब्बों की व्यवस्था और शरणार्थियों के सुरक्षित परिवहन पर खर्च किया गया।
पहली बार शुरू हुईं ये अहम योजनाएं
जॉन मथाई के रेल बजट में आत्मनिर्भर भारत की झलक भी दिखी। इसी बजट में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स की नींव रखने की योजना बनी, ताकि भारत खुद के इंजन बना सके। साथ ही थर्ड क्लास डिब्बों में सुधार, यात्रियों के लिए पंखों की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर जोर दिया गया।
करीब 92 साल तक अलग-अलग पेश होने के बाद साल 2017 में रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया। लेकिन भारत के पहले रेल बजट की कहानी आज भी बताती है कि कैसे रेलवे ने मुश्किल दौर में देश को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई।





