Premanand Ji Maharaj Pravachan: वृंदावन के प्रसिद्ध संत और कथावाचक प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचनों के जरिए जीवन की गहरी सच्चाइयों को बहुत ही सरल और देसी भाषा में समझाते हैं। उनका कहना है कि इंसान से गलती होना स्वाभाविक है। जीवन में आगे बढ़ते हुए हर व्यक्ति से कभी न कभी भूल होती है, लेकिन जो अपनी गलती समझकर उसे दोबारा नहीं दोहराता, वही सच्चा इंसान कहलाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, सच्चे मन से पश्चाताप करने पर भगवान अधिकतर पापों को क्षमा कर देते हैं।
कौन सा पाप भगवान भी नहीं करते माफ
हाल ही में एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि क्या कोई ऐसा पाप है, जिसे भगवान भी माफ नहीं करते। इस पर महाराज ने बहुत साफ शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पूरे संसार में एक ही ऐसा महापाप है, जिसे भगवान कभी क्षमा नहीं करते, और वह है भगवान के भक्त के साथ विश्वासघात करना। किसी सच्चे भक्त को धोखा देना, उसका अपमान करना या उसे जानबूझकर दुख पहुंचाना सबसे बड़ा अपराध माना गया है।
भक्त से विश्वासघात क्यों माना गया महापाप
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि भगवान अपने भक्तों से बेहद प्रेम करते हैं। जो व्यक्ति ईमानदारी से भगवान का भजन करता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। ऐसे में अगर कोई इंसान भगवान के भक्त को धोखा देता है, तो यह सीधा भगवान का अपमान माना जाता है। इसी वजह से शास्त्रों में कहा गया है कि भक्त से विश्वासघात करने वाला व्यक्ति चाहे जितना भी पछतावा कर ले, उसे इस पाप से मुक्ति नहीं मिलती।
द्वेष और दुर्भावना क्या होती है
महाराज ने आगे बताया कि द्वेष यानी किसी के प्रति मन में जलन, नफरत या बुरा सोच रखना भी एक तरह का पाप है। यह जानबूझकर किया गया ऐसा भाव होता है, जिससे सामने वाले को मानसिक या भावनात्मक चोट पहुंचती है। द्वेष इंसान के मन को धीरे-धीरे अशांत कर देता है और उसे गलत रास्ते पर ले जाता है। यही वजह है कि संत हमेशा साफ मन और निर्मल भाव रखने की सलाह देते हैं।
द्वेष और महापाप से कैसे बचें
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि अगर आपके मन में किसी के लिए द्वेष की भावना आ रही है, तो सबसे पहले उसकी वजह पर विचार करें। अगर वजह छोटी है, तो तुरंत माफ कर देना ही सबसे बड़ा धर्म है। और अगर कारण बड़ा भी हो, तो खुद को समझाइए कि इससे सामने वाले का नहीं, बल्कि आपका ही नुकसान हो रहा है। द्वेष रखने से पाप बढ़ता है और मन कभी शांत नहीं होता। इसलिए संवाद, समाधान और क्षमा का रास्ता अपनाएं।
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देसी सीख: साफ मन ही सच्ची भक्ति
महाराज की सीख बिल्कुल साफ है – भक्ति का रास्ता साफ मन से होकर जाता है। भगवान का नाम लेने से पहले मन से द्वेष, जलन और धोखे को निकालना जरूरी है। जो व्यक्ति दूसरों के प्रति अच्छा भाव रखता है, वही सच्चे अर्थों में भगवान का प्रिय बनता है। यही जीवन की असली सच्चाई और सनातन धर्म का मूल संदेश है।





