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“राम नाम से नफरत करती है कांग्रेस”, वीबी-जी रामजी बिल पर प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विपक्ष को घेरा

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खबरवाणी

“राम नाम से नफरत करती है कांग्रेस”, वीबी-जी रामजी बिल पर प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विपक्ष को घेरा

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​तुष्टीकरण का आरोप: मंत्री बोले- गांधी जी के प्रिय ‘राम’ के नाम पर आपत्ति करना करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर कुठाराघात।

योजनाओं का इतिहास: कांग्रेस ने सिर्फ वोट के लिए बदले नाम, मोदी सरकार ने महापुरुषों को दिया वास्तविक सम्मान।

नरसिंहपुर – भारतीय जनता पार्टी जिला संगठन द्वारा स्थानीय सावित्री सिग्नेचर होटल में वीबी-जी राम जी बिल को लेकर प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को मध्यप्रदेश शासन के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण व जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने संबोधित किया। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष रामस्नेही पाठक, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटैल, विधायक विश्वनाथ सिंह पटैल, महेन्द्र नागेश जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति काकोड़िया, नगर पालिका अध्यक्ष नीरज महाराज, वीबीजी रामजी के जिला सहसंयोजक संतोष दुबे, मोहरकांत गुर्जर, धनंजय पटैल, जिला मीडिया प्रभारी अभिनव शर्मा मंचस्थ रहे।
वीबी-जी रामजी योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी, मनरेगा में मिलता था सिर्फ 100 दिन का काम
प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहां कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है वीबी-जी रामजी जी योजना। वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को समृद्ध बनाएगी। इस योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी है, जबकि मनरेगा में सिर्फ 100 दिन काम मिलता था। नई योजना में भुगतान 7 दिनों में किया जावेगा। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी। कांग्रेस के शासनकाल की अपेक्षा मोदी जी ने इस योजना पर ज्यादा खर्च किया है। मनरेगा में अब तक 11.74 लाख करोड रूपये खर्च हुए जिसमें मोदी सरकार द्वारा 8.53 लाख करोड़ रूपये खर्च किये गए है। कांग्रेस के समय जहां 35 हजार करोड़ मिलते थे, जिसे बढ़ाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 74 हजार करोड़ किया और अब सुधारों के साथ लागू की जा रही इस योजना का बजट बढ़ाकर 95 हजार करोड़ कर दिया है। बजट में यह बढ़ोत्तरी कांग्रेस के शासनकाल के समय से लगभग तीन गुना अधिक है। प्रधानमंत्री जी महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को जमीन पर उतार रहे हैं।

कभी भी मजदूरी प्राप्त कर सकते हैं मजदूर, राज्य 60 दिन कर सकते हैं अधिसूचित
प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहां कि पुरानी योजना में वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त किया जा सकता है, जबकि नई योजना में कृषि के व्यस्ततम समय जैसे बुवाई, कटाई के दौरान पर्याप्त कृषि श्रमिकों की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया गया है। नई योजना में राज्यों को 60 दिन अधिसूचित करने का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत फसलों की बुवाई, कटाई के समय को सम्मिलित कर खेती के लिए मजदूरों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इस तरह 125 दिन के साथ मजदूरों को 60 दिन खेती किसानी में भी कार्य करने के लिए मिलेंगे।
कांग्रेस ने बार बार योजनाओं का नाम बदला वोट के लिये महात्मा गांधी जी का जोड़ा नाम
प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि श्रमिको को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु बनाई गई योजना का 1980 में इन्द्रा गांधी ने नाम बदला फिर राजीव गांधी ने इसे जवाहर रोजगार योजना नाम दिया। 2004 मे नरेगा था बाद में कांग्रेस ने योजना के जरिये वोट की राजनीति करने हेतु महात्मा गांधी जी का नाम जोड़ मनरेगा किया। कांग्रेस ने देश के लगभग 600 संस्थानो योजनाओं व पुरूष्कारो के नाम गांधी परिवार के नाम पर रखे थे उन्होने खेल रत्न को राजीव गांधी जी के नाम, नेहरू जी के जन्मदिवस को बाल दिवस का नाम देकर व नेहरू गांधी खानदान के सदस्यों की जन्मतिथि व पुण्य तिथि को राष्ट्रीय पर्व व राष्ट्रीय शोक का दर्जा दिया इसके उलट देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने सुभाषचंद्र बोस, वीर सावरकर, सरदार बल्लभ भाई पटैल, लालबहादुर शास्त्री जैसे अनेको महापुरूषो की जयंतियो को विस्तृत रूप में मनाकर उन्हे अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की मोदी जी ने राजभवन – लोकभवन, राजपथ – कर्तव्यपथ, प्रधानमंत्री कार्यालय – सेवा तीर्थ किया गया।
भगवान राम के नाम से नफरत करती है कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी व गांधी परिवार भगवान राम के नाम से नफरत करते है तभी योजना में भगवान राम के नाम पर आपत्ति कर रहे है जबकि गांधी जी का प्रिय शब्द था राम । कांग्रेस केवल तुष्टीकरण की राजनीति व संकुचित मानसिकता के कारण योजना में राम का नाम आने पर विरोध कर रही है जबकि मोदी जी ने योजना में राम का नाम लाकर गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। गांधी भगवान राम का मंदिर 500 साल के संघर्ष के बाद बनकर तैयार हुआ है तब से आज दिनांक तक गांधी परिवार का कोई सदस्य व इंडी गठबंधन के नेता राम मंदिर में भगवान राम के दर्शन करने नहीं गये जबकि भगवान राम इस देश के हर जन के मन में व लोगों के प्राण में बसते उन भगवान राम के नाम को योजना के नाम में समाहित करने पर कांग्रेस इस बिल का विरोध कर रही है जो करोड़ो हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात है।
योजना में पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं
प्रभारी मंत्री ने बताया कि वीबी-जी रामजी योजना में और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए होने वाले कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा सभी श्रमिकों को त्वरित एवं उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तथा बायोमेट्रिक भुगतान प्रणाली का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता के लिए ग्राम-सभा द्वारा सोशल ऑडिट भी कराने का प्रावधान है। नई योजना में पंचायतीराज संस्थाओं जैसे ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य परिषद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
रोजगार को कानूनी अधिकार बनाया गया है, काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा
श्री राजपूत ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 125 दिन रोजगार या आजीविका का अवसर वैधानिक अधिकार है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों, खानाबदोस, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, छोटे व सीमांत किसानों के लिए भी रोजगार का प्रावधान किया गया है। अकुशल शारीरिक कार्यों की मजदूरी दरें केंद्र सरकार तय करेगी। यदि किसी ग्रामीण परिवार को मांग प्रस्तुत करने के पश्चात निर्धारित समय-सीमा में रोजगार नहीं मिलता तो निर्धारित दरों एवं शर्तों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता का भी प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के साधन, रूकेगा पलायन
उन्होने बताया कि वीबी-जी रामजी से ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार उपलब्ध होगा, जिससे पलायन रुकेगा और परिवार एकजुट रहेंगे। गांवों में ही मजदूर उपलब्ध होने से खेती में श्रमिक संकट समाप्त होगा और किसान और अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे। मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगी। मजदूरों की आय गांव में ही रहने से स्थानीय बाजार, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। योजना से किसान, मजदूर और गांव, तीनों को लाभ मिलेगा। यह योजना समाज के अंतिम पायदान पर खड़े मजदूरों और किसानों को आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करेगी। महात्मा गांधी जी कहते थे कि भारत गांवों में बसता है। भारत का विकास करना है तो गांवों का विकास करना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महात्मा गांधी की उसी परिकल्पना को साकार करने के लिए वीबी-जी रामजी योजना बनाई है।
अधोसंरचना के स्थाई निर्माण के साथ आजीविका का दायरा भी बढ़ाया गया है-
मंत्री श्री राजपूत ने जानकारी देते हुए कहा कि सुधारों के साथ लागू की जा रही नई योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत की राशि वहन करेगी। कई मामलों में पहले केंद्र सरकार ही निर्णय लेता था, लेकिन अब राज्य सरकारें भी गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास को ध्यान में रखकर कार्यों को शामिल कर सकते हैं। नरेगा में विद्यालय भवन, पुस्तकालय, कोल्ड स्टोरेज, ग्रामीण पार्किंग, सौर ऊर्जा, नवकरणीय ऊजा, जैविक खाद इकाई, बाढ़ आश्रय स्थल, आपदा में क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, जल जीवन मिशन के कार्यों में सुधार एवं रखरखाव जैसे कार्य शामिल नहीं थे। नई योजना में यह सभी कार्य शामिल किए गए हैं। जैविक खाद निर्माण इकाइयां, पशुपालन, मुर्गी-पालन शेड, मत्स्य पालन संबंधी निर्माण कार्य, नर्सरी निर्माण, भवन-निर्माण सामग्री उत्पादन इकाई निर्माण का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को बढ़ाने के लिए किया गया है।

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