अमेरिका ने सीरिया में आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाते हुए 35 ठिकानों पर बमबारी की है। यह कार्रवाई हाल ही में हुए उस हमले के जवाब में की गई है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। इस एयरस्ट्राइक के बाद पूरी दुनिया की नजरें एक बार फिर पश्चिम एशिया पर टिक गई हैं। अमेरिकी सेना ने साफ कर दिया है कि वह अपने सैनिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी।
अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद लिया गया बदला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह हमला सीधे तौर पर उस घटना का जवाब है, जिसमें अमेरिकी सैन्य कर्मियों की जान गई थी। अमेरिका का कहना है कि अगर उसके जवानों को निशाना बनाया गया, तो जवाब और भी सख्त होगा। इसी नीति के तहत सीरिया में मौजूद ISIS के सक्रिय ठिकानों को टारगेट किया गया।
35 आतंकी ठिकानों पर सटीक बमबारी
CENTCOM की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि अमेरिकी वायुसेना ने ISIS के 35 ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया। इन इलाकों में आतंकियों के हथियारों के गोदाम, ट्रेनिंग सेंटर और ऑपरेशनल बेस मौजूद थे। खुफिया जानकारी के आधार पर इन जगहों को चुना गया और फिर सटीक एयरस्ट्राइक की गई, ताकि आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया जा सके।
हमले का वीडियो आया सामने
इस हमले का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अमेरिकी फाइटर जेट्स को उड़ान भरते और सीरिया में बम गिराते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो अमेरिका की सैन्य ताकत और उसकी पहुंच को साफ तौर पर दिखाता है। इस कार्रवाई को ईरान के लिए भी एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।
नागरिकों को नुकसान न होने का दावा
अमेरिकी सेना का दावा है कि इस हमले में केवल आतंकियों के ठिकानों को ही निशाना बनाया गया है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा है। अमेरिका ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई करते समय आम लोगों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।
ISIS की कमर तोड़ने की कोशिश
अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ISIS की आतंक फैलाने की क्षमता को कमजोर करना है। संगठन के ढांचे, हथियारों और ट्रेनिंग सिस्टम को नष्ट करके उसके भविष्य के हमलों को रोका जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह सिर्फ एक जवाबी हमला नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली रणनीति का हिस्सा है।
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पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
इस एयरस्ट्राइक के बाद सीरिया और आसपास के इलाकों में तनाव और बढ़ गया है। हालांकि अमेरिका ने साफ किया है कि वह अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। आने वाले दिनों में इस कार्रवाई के असर और इसके राजनीतिक नतीजों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।





