डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर दिया गया बयान सिर्फ कूटनीति या रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 500 साल पुरानी उपनिवेशवादी सोच को फिर से जिंदा करता नजर आता है। जिस तरह पहले ताकतवर देश जहाजों के दम पर दूसरे इलाकों पर दावा ठोक देते थे, वही मानसिकता आज के दौर में भी खतरनाक साबित हो सकती है। ट्रंप का बयान इतिहास के उन जख्मों को कुरेदता है, जिन्हें दुनिया बड़ी मुश्किल से भर पाई है।
ट्रंप ग्रीनलैंड पर नजर क्यों लगाए बैठे हैं
एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप का कहना है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कदम नहीं उठाया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर सकता है। ट्रंप के अनुसार वे नहीं चाहते कि रूस या चीन अमेरिका का पड़ोसी बने। इसी सोच के चलते उन्होंने कहा कि “हम ग्रीनलैंड के लिए कुछ करेंगे, चाहे आसान तरीके से हो या मुश्किल तरीके से।” यही बयान दुनिया के कई देशों को चिंता में डाल रहा है।
500 साल पुरानी दलील क्यों है खतरनाक
ट्रंप ने यह भी कहा कि सिर्फ इसलिए कि डेनमार्क के जहाज 500 साल पहले वहां पहुंचे, इसका मतलब यह नहीं कि वह जमीन उनकी हो गई। यह तर्क सुनने में भले ही सीधा लगे, लेकिन अगर इसे मान लिया जाए, तो दुनिया की आधी आबादी को अपनी मौजूदा जमीन छोड़नी पड़ेगी। यही वजह है कि ट्रंप का बयान सिर्फ ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।
खोजकर्ताओं की कहानी और अमेरिका का सच
इतिहास गवाह है कि 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका पहुंचकर यूरोप और अमेरिका के बीच संपर्क स्थापित किया। इसके बाद यूरोप से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका पहुंचे और वहीं बस गए। आज अमेरिका की बड़ी आबादी उन्हीं लोगों की संतान है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप की सोच के मुताबिक इन लोगों को भी अपने पूर्वजों के देशों में लौट जाना चाहिए?
भारत से लेकर अफ्रीका तक पहुंचे जहाज
1498 में वास्को-दा-गामा भारत के कालीकट पहुंचा। पुर्तगाली, स्पेनिश, डच, ब्रिटिश और फ्रेंच खोजकर्ता अफ्रीका, एशिया, अमेरिका और ओशिनिया तक पहुंचे। किसी ने भारत, किसी ने ब्राजील, तो किसी ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक समुद्री रास्तों से पहुंच बनाई। कई जगहों पर उन्होंने राज किया, फिर लौट गए। लेकिन वहां की जनता वहीं की होकर रह गई।
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अगर ट्रंप की सोच लागू हुई तो क्या होगा
अगर ट्रंप की दलील को मान लिया जाए, तो करीब 40 से ज्यादा देशों के लोग संकट में पड़ सकते हैं, जिनमें खुद अमेरिका भी शामिल है। हर देश में किसी न किसी दौर में बाहरी लोग पहुंचे हैं। ऐसे में यह सोच न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि दुनिया में अराजकता फैला सकती है।





