अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर कल एक बेहद अहम फैसला आने वाला है। यह फैसला सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसी वजह से पूरी दुनिया की नजरें इस समय वॉशिंगटन पर टिकी हुई हैं। भारत सरकार और शेयर बाजार भी इस फैसले को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि इससे आयात-निर्यात और व्यापारिक रिश्तों की दिशा तय हो सकती है।
किन टैरिफ पर हो रहा है विवाद
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए थे। चीन, कनाडा, मैक्सिको और भारत जैसे देशों से आने वाले सामान पर 10 से 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया गया। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी था।
किस कानून के तहत लगाए गए टैरिफ
ट्रंप सरकार ने यह टैरिफ International Emergency Economic Powers Act (IEEPA), 1977 के तहत लगाए थे। इस कानून के जरिए राष्ट्रपति को आपात स्थिति में आर्थिक फैसले लेने का अधिकार मिलता है। लेकिन कई देशों और अमेरिकी व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। निचली अदालतों ने माना कि इस तरह के टैरिफ लगाना कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि सीधे राष्ट्रपति के। इसके बाद मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
भारत और बाकी देशों के लिए क्यों अहम है फैसला
अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी ठहराता है, तो भारत समेत कई देशों को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा और अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ता हो सकता है। वहीं अगर फैसला ट्रंप प्रशासन के पक्ष में जाता है, तो भविष्य में भी अमेरिका ऐसे टैरिफ का इस्तेमाल हथियार की तरह कर सकता है। इससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता बढ़ने का खतरा रहेगा।
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फैसला पलटा तो अमेरिका पर पड़ेगा भारी बोझ
अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को रद्द कर देता है, तो अमेरिका को करीब 140 अरब डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं, जो अलग-अलग देशों से वसूले गए थे। यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ साबित हो सकता है। हालांकि खबरें यह भी हैं कि ट्रंप समर्थक खेमा पहले से ही कानूनी रास्ते खोजने में जुटा है, ताकि किसी न किसी तरीके से टैरिफ को जारी रखा जा सके।





