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वरदान से मुक्त होने के लिए बाणासुर ने कराया कृष्ण–शिव युद्ध

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खबरवाणी

वरदान से मुक्त होने के लिए बाणासुर ने कराया कृष्ण–शिव युद्ध

देवी कीर्ति किशोरी

खबर वाली न्यूज़, रफीक

सारनी। स्टेडियम पाथाखेडा के पास चल रही महा शिव पुराण कथा में कथावाचिका देवी कीर्ति किशोरी ने बाणासुर, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव से जुड़ी अद्भुत कथा का वर्णन किया। कथा समिति के संरक्षक बृजकिशोर पवार (डब्बू पवार) एवं खुशीलाल पवार ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे।
कथा के अनुसार, सोनितपुर गांव में बाणासुर नामक राक्षस रहता था, जो प्रतिदिन लगभग 10 घंटे भगवान शिव की पूजा करता था। अधिक समय लगने से परेशान होकर उसने भगवान शिव की 1000 वर्षों तक कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए। बाणासुर ने वरदान स्वरूप 1000 हाथ मांगे, जिससे वह कम समय में पूजा कर सके।
कुछ समय बाद बाणासुर अपने ही वरदान से परेशान हो गया और वरदान वापस लेने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने वरदान वापस लेने में असमर्थता जताते हुए उपाय बताया कि जिस दिन उसके घर का ध्वज झुकेगा, उस दिन भगवान विष्णु से उसका युद्ध होगा और उसी युद्ध में उसके 1000 हाथ कट जाएंगे। बाणासुर की शर्त पर भगवान शिव ने युद्ध में साथ देने की स्वीकृति दी।
आगे कथा में बताया गया कि बाणासुर की पुत्री ऊषा ने स्वप्न में अनिरुद्ध जी को देखा और प्रेम कर बैठी। उसकी सखी चित्रलेखा, जो मायावी शक्ति से युक्त थी, अनिरुद्ध जी को द्वारका से सोनितपुर ले आई। जब यह बात बाणासुर को पता चली तो उसने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया।
देवर्षि नारद से सूचना मिलने पर भगवान श्रीकृष्ण सोनितपुर पहुंचे। युद्ध के दौरान बाणासुर द्वारा ब्रह्मास्त्र चलाने पर भगवान शिव प्रकट हुए और श्रीकृष्ण–शिव के बीच दिव्य युद्ध हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने बाणासुर के एक-एक कर 1000 हाथ काट दिए। अंत में भगवान शिव के उपदेश पर बाणासुर श्रीकृष्ण के चरणों में गिर पड़ा।
युद्ध के पश्चात ऊषा–अनिरुद्ध का विवाह संपन्न हुआ और बाणासुर वरदान से मुक्त हुआ। कथा के समापन पर देवी कीर्ति किशोरी ने कहा कि यह सब शिव कृपा और भगवान की लीला का प्रतिफल है।
कथा श्रवण में सुभाष पवार, हेमंत साहू, महेंद्र पवार, राजा पवार, छोटू वर्मा, निशांत भंडारे, रोहित गोहे, कैलाश पाटिल, दिलीप यादव, सरपंच लाखापुर आमला सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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