दिल्ली की हवा बीते कई महीनों से लोगों की सांसों पर भारी पड़ रही है। बढ़ता प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि सियासी संग्राम का बड़ा कारण बन गया है। आज से शुरू हो रहे दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रदूषण सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के पूरे आसार हैं।
प्रदूषण बना विधानसभा सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा
दिल्ली में सर्दी के साथ ही प्रदूषण चरम पर पहुंच गया है। स्मॉग, जहरीली हवा और आंखों में जलन आम बात हो गई है। इसी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। विपक्ष का कहना है कि बीते चार महीनों से दिल्लीवासी दूषित हवा में जीने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है।
नेता प्रतिपक्ष आतिशी का बड़ा आरोप
विधानसभा सत्र से पहले नेता प्रतिपक्ष आतिशी सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रहना मुश्किल हो गया है और लोग सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं। आतिशी का आरोप है कि सरकार एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI मॉनिटरों के आंकड़ों में हेरफेर कर रही है ताकि असली हालात सामने न आ सकें। उनका कहना है कि सच्चाई छुपाकर जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।
सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप
आतिशी ने यह भी कहा कि प्रदूषण को लेकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हालात इतने खराब नहीं हैं, तो स्कूल बंद क्यों करने पड़ रहे हैं और बुजुर्गों व बच्चों को घर में रहने की सलाह क्यों दी जा रही है। विपक्ष का दावा है कि सरकार सिर्फ बयानबाजी कर रही है, ज़मीनी स्तर पर काम न के बराबर है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का जवाब
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और इसकी जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि सभी की है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को मिलकर समाधान निकालना चाहिए। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि विधानसभा सत्र का मकसद नीति निर्माण और उनके क्रियान्वयन पर चर्चा करना है, न कि केवल आरोप प्रत्यारोप।
Read Also:Ration Card e-KYC जरूरी: बिना ई-केवाईसी नहीं मिलेगा राशन, जानें ऑनलाइन और ऑफलाइन सबसे आसान तरीका
आज हंगामेदार रहने के आसार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आज का विधानसभा सत्र काफी हंगामेदार रह सकता है। विपक्ष प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा, वहीं सरकार अपने कदमों का बचाव करेगी। साफ है कि दिल्ली की जहरीली हवा अब राजनीति की गर्मी भी बढ़ा रही है। आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस सियासी बहस से कोई ठोस समाधान निकल पाएगा या फिर मुद्दा सिर्फ शोर तक सीमित रह जाएगा।





