NASA का ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन एक बार फिर दुनिया को हैरान करने वाला है। इंसानियत का संदेशवाहक कहा जाने वाला वॉयेजर-1 अंतरिक्ष यान नवंबर 2026 में एक ऐसा मुकाम हासिल करने जा रहा है, जिस पर आज तक कोई यान नहीं पहुंचा। यह खबर सिर्फ विज्ञान प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता के लिए गर्व की बात है।
क्या है एक लाइट डे और क्यों है यह खास
आमतौर पर हम दूरी को किलोमीटर में नापते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में दूरी इतनी ज्यादा होती है कि वहां रोशनी की रफ्तार से नाप किया जाता है। एक लाइट डे यानी वह दूरी, जिसे रोशनी तय करने में पूरे 24 घंटे लगते हैं। NASA के मुताबिक यह दूरी करीब 26 अरब किलोमीटर होती है। नवंबर 2026 में वॉयेजर-1 धरती से ठीक इतनी दूरी पर पहुंच जाएगा।
दो दिन बाद मिलेगा एक मैसेज का जवाब
वॉयेजर-1 की दूरी बढ़ने का मतलब है कि उससे संपर्क करना भी और मुश्किल हो जाएगा। अगर धरती से आज सुबह 8 बजे कोई सिग्नल भेजा जाए, तो वह अगले दिन सुबह 8 बजे वॉयेजर तक पहुंचेगा। वहां से जवाब आने में फिर 24 घंटे लगेंगे। यानी एक छोटे से ‘गुड मॉर्निंग’ का जवाब मिलने में पूरे दो दिन लग जाएंगे।
48 साल से जारी है अनथकी यात्रा
1977 में लॉन्च हुआ वॉयेजर-1 आज इंसानी इतिहास का सबसे दूर तक पहुंचने वाला अंतरिक्ष यान है। यह पिछले 48 सालों से लगातार अंतरतारकीय अंतरिक्ष में सफर कर रहा है। शनि ग्रह को पार करने के बाद से यह धरती से दूर ही दूर जाता चला गया और आज करीब 25 हजार करोड़ किलोमीटर दूर है।
बूढ़ा यान लेकिन हौसले जवान
NASA के वैज्ञानिक अब वॉयेजर-1 को अंतरिक्ष का बुजुर्ग नागरिक कहते हैं। इसकी उम्र बढ़ने के साथ कई उपकरण बंद करने पड़े हैं, ताकि ऊर्जा बचाई जा सके। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ठंड के कारण अगर इसके ईंधन पाइप जम गए, तो एंटीना का रुख बदल सकता है और धरती से संपर्क हमेशा के लिए टूट सकता है।
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भविष्य की खोज और अंतरिक्ष का अनजाना सच
वॉयेजर-1 और उसका जुड़वां वॉयेजर-2 ऐसे इकलौते यान हैं, जो सूरज के प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकल चुके हैं। वैज्ञानिक उस सीमा को समझना चाहते हैं, जहां सूरज की गर्म हवाएं और ठंडा अंतरतारकीय अंतरिक्ष मिलते हैं। आने वाले सालों में वॉयेजर-1 से मिलने वाला हर डेटा अंतरिक्ष के बड़े रहस्यों से पर्दा उठा सकता है।





