मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई हाई लेवल बैठक में सीएम ने जिम्मेदार अफसरों पर बड़ी कार्रवाई के आदेश दिए।
प्रशासन पर सख्ती, जवाबदेही तय
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा कि लोगों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अफसरों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। बैठक के दौरान इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद तुरंत कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।
अतिरिक्त आयुक्त समेत इन अफसरों पर कार्रवाई
दूषित पानी मामले में नगर निगम आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और जल प्रदाय विभाग से जुड़े इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई है। जानकारी के अनुसार इंदौर नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त को पद से हटा दिया गया है। वहीं जल वितरण विभाग का प्रभार संभाल रहे अधीक्षण यंत्री से भी जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। नगर निगम आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और जल्द जवाब मांगा गया है।
भगीरथपुरा में पानी की लाइन सील, मरम्मत जारी
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि भगीरथपुरा क्षेत्र में जिस पानी की लाइन से गंदा पानी सप्लाई हो रहा था, उसे सील कर दिया गया है। पाइपलाइन की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है और पूरे इलाके में लीकेज की जांच चल रही है। स्थानीय लोगों को साफ तौर पर कहा गया है कि नल का पानी पीने या घरेलू उपयोग में न लाएं।
जनता का गुस्सा सड़क पर, अफसरों के खिलाफ प्रदर्शन
इस घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक पानी की टंकी तक पहुंचे और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की। हाथों में तख्तियां लेकर लोगों ने नगर निगम और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर भी सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
सरकार का संदेश साफ, लापरवाही नहीं चलेगी
सीएम मोहन यादव की इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि खाली पदों पर तुरंत नए और जिम्मेदार अफसरों की नियुक्ति की जाए। साथ ही पूरे शहर में जल आपूर्ति व्यवस्था की दोबारा जांच कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।





