Republic Day 2026: हर साल 26 जनवरी को जब गणतंत्र दिवस की परेड टीवी पर या कर्तव्य पथ पर देखते हैं, तो मन में एक सवाल जरूर आता है कि तीनों सेनाओं के ये जांबाज जवान आखिर चुने कैसे जाते हैं। ये कोई आम चयन नहीं होता, बल्कि इसके पीछे महीनों की मेहनत, कड़ी जांच और सख्त ट्रेनिंग छिपी होती है। आइए आसान और देसी भाषा में समझते हैं पूरी प्रक्रिया।
चयन की शुरुआत कब और कैसे होती है
गणतंत्र दिवस परेड के लिए जवानों का चयन हर साल सितंबर महीने से शुरू हो जाता है। सबसे पहले सेना की अलग-अलग रेजिमेंट्स से बेहतरीन जवानों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है। इसमें जवान की फिटनेस, अनुशासन, मार्चिंग स्किल और रेजिमेंट में उसका रिकॉर्ड देखा जाता है। जो जवान हर कसौटी पर खरा उतरता है, वही आगे की प्रक्रिया में शामिल होता है।
फिटनेस और अनुशासन की होती है कड़ी परीक्षा
चयन प्रक्रिया में फिजिकल फिटनेस सबसे अहम मानी जाती है। जवान की लंबाई, वजन, स्टेमिना और चाल-ढाल को बारीकी से परखा जाता है। इसके साथ ही यह भी देखा जाता है कि वह आदेशों का पालन कितनी ईमानदारी से करता है। सेना में अनुशासन ही पहचान होता है, इसलिए जरा सी ढील भी चयन से बाहर कर सकती है।
कहां होती है पूरी चयन प्रक्रिया
पूरी प्रक्रिया मुख्य रूप से कांपटी रेजिमेंटल सेंटर में होती है। रक्षा मंत्रालय द्वारा तय की गई रेजिमेंट को हर साल मौका मिलता है। कुल 27 रेजिमेंट्स में से बारी-बारी से चयन किया जाता है ताकि देश के हर कोने का जवान परेड में नजर आए। कई बार तो पूरी रेजिमेंट के जवान परेड में जाने की इच्छा जताते हैं, जिससे चयन और भी मुश्किल हो जाता है।
जवानों की होती है गहरी जांच
जब जवानों के नाम ऊपर तक पहुंचते हैं, तब शुरू होती है स्क्रूटनी यानी गहन जांच। इसमें जवान का पूरा बैकग्राउंड देखा जाता है। ट्रेनिंग के दौरान उसका प्रदर्शन, सीनियर अधिकारियों और साथियों के साथ व्यवहार, और सेना के नियमों का पालन सब कुछ परखा जाता है। जो जवान हर पैमाने पर सही पाया जाता है, वही आगे बढ़ता है।
आखिर कितने जवान परेड में उतरते हैं
हर साल करीब 30 हजार जवानों का चयन अलग-अलग चरणों में होता है, लेकिन अंतिम परेड में सिर्फ 200 जवानों को ही मौका मिलता है। इनमें 20 अधिकारी और 180 जवान शामिल होते हैं। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए कुछ जवान और अधिकारी रिजर्व में भी रखे जाते हैं, ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत बदलाव किया जा सके।





