साल 2025 अब इतिहास बन चुका है। भारत के कई हिस्सों में लोगों ने साल का आखिरी सूर्यास्त देखा, वहीं दुनिया के एक कोने में नए साल 2026 का जश्न शुरू हो गया। हर साल की तरह इस बार भी समय-क्षेत्र (टाइम जोन) के कारण अलग-अलग देशों में नए साल का आगमन अलग समय पर हुआ।
भारत में 2025 का आखिरी सूर्यास्त
भारत में 31 दिसंबर 2025 की शाम को कई जगहों पर साल का आखिरी सूरज डूबता नजर आया। ओडिशा के पुरी, जो भगवान जगन्नाथ की नगरी है, वहां समुद्र तट पर लोगों ने आखिरी सूर्यास्त का अद्भुत नजारा देखा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में भी लोगों ने 2025 के अंतिम सूर्यास्त को कैमरों में कैद किया।
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या के सरयू घाट पर भी श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर और प्रार्थना कर साल को विदाई दी।
भारत में नए साल की तैयारियां जोरों पर
जैसे ही सूरज डूबा, वैसे ही देशभर में नए साल 2026 के स्वागत की तैयारियां तेज हो गईं। बाजारों में रौनक, होटलों और क्लबों में पार्टी की तैयारियां और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना देखने को मिली। लोग पुराने साल को अलविदा कहकर नए साल से नई उम्मीदें जोड़ते नजर आए।
दुनिया में सबसे पहले यहां आया नया साल 2026
जब भारत में अभी रात होने वाली थी, तब न्यूजीलैंड में घड़ी ने 12 बजा दिए और वहां नया साल 2026 शुरू हो गया। टाइम जोन के हिसाब से न्यूजीलैंड दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां दिन सबसे पहले शुरू होता है। ऑकलैंड और वेलिंगटन जैसे शहरों में आतिशबाजी के साथ नए साल का स्वागत किया गया।
किरिबाती ने सबसे पहले किया 2026 का स्वागत
जानकारी के मुताबिक, प्रशांत महासागर में स्थित किरिबाती (Kiribati) के लाइन आइलैंड्स दुनिया के पहले इलाके हैं, जहां आधिकारिक रूप से नया साल शुरू होता है। यहां जैसे ही आधी रात हुई, वैसे ही 2026 का आगाज हो गया। इसके बाद ओशिनिया के अन्य हिस्सों में नए साल का जश्न शुरू हुआ।
आखिरी में नया साल मनाएंगे ये देश
जहां कुछ देशों में सबसे पहले नया साल आता है, वहीं कुछ जगहों पर दिन सबसे आखिर में शुरू होता है। अमेरिका के हाउलैंड आइलैंड और बेकर आइलैंड ऐसे इलाके हैं, जहां दुनिया में सबसे आखिरी बार नया साल पहुंचता है। इसके बाद धीरे-धीरे पूरी दुनिया नए साल 2026 में प्रवेश कर लेती है।





