खबरवाणी
आदिवासी अंचल होने की सज़ा भुगत रहे ग्रामीण, भीमपुर–खामापुर सड़क पर सरकारी बेरुख़ी
रिपोर्ट प्रदीप यादव भीमपुर
भीमपुर से खामापुर गाँव को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली अब केवल विकास की विफलता नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल के साथ हो रहे खुले भेदभाव का प्रतीक बन चुकी है। जिस रास्ते से रोज़ाना आदिवासी परिवार, महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग गुजरते हैं, वही सड़क वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। सवाल यह है कि क्या आदिवासी होना विकास से वंचित रहने का कारण बन गया है?
सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यह मार्ग अब दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। गड्ढों, कीचड़ और टूटी सतह से भरी इस सड़क पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। बरसात में यह रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चे और बीमार मरीज सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। एंबुलेंस तक इस मार्ग पर फँस जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद न तो प्रशासन ने सुध ली और न ही क्षेत्र के विधायक महोदय ने इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लिया। लोगों का आरोप है कि आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण इस सड़क को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि अन्य क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से होते दिखाई देते हैं।
इस उपेक्षा को लेकर आदिवासी समुदाय में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ-साथ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
भीमपुर–खामापुर सड़क केवल ईंट-पत्थर का मार्ग नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल के सम्मान, अधिकार और समान विकास का सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन और विधायक महोदय इस सामाजिक अन्याय पर कब तक चुप्पी साधे रहते हैं।





