INS Kalvari Submarine Features: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्नाटक के कारवार स्थित INS कदंबा नेवल बेस का दौरा किया और इसके बाद INS कलवरी (S-21) पनडुब्बी में समुद्र के भीतर यात्रा की। राष्ट्रपति का इस तरह पनडुब्बी में सफर करना बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक माना जाता है। इससे पहले वह स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर और राफेल फाइटर जेट में भी सफर कर चुकी हैं। यह यात्रा भारतीय नौसेना के जवानों का हौसला बढ़ाने वाली रही।
INS कलवरी क्यों कहलाती है ‘साइलेंट किलर’?
INS कलवरी को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दुश्मन के रडार और सोनार सिस्टम को चकमा देने में माहिर है। इसमें एडवांस्ड अकॉस्टिक साइलेंसिंग टेक्नोलॉजी लगी है, जिससे यह समुद्र के अंदर लगभग अदृश्य हो जाती है। दुश्मन को भनक लगे बिना हमला करने की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
ताकत और टेक्नोलॉजी का जबरदस्त मेल
INS कलवरी को प्रोजेक्ट-75 के तहत बनाया गया है। इसे मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने फ्रांस की नेवल ग्रुप कंपनी के साथ मिलकर डिजाइन किया है। यह पनडुब्बी डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों सिस्टम पर काम करती है। इसकी लंबाई करीब 67.5 मीटर है और इसमें 40 से 45 नौसैनिक तैनात रह सकते हैं।
50 दिन तक पानी के नीचे, दुश्मन बेखबर
INS कलवरी एक बार में करीब 50 दिन तक समुद्र के नीचे रह सकती है। यह लगभग 12,000 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है। सतह पर इसका वजन 1600 टन और पानी के अंदर 1800 टन हो जाता है। इसकी रफ्तार सतह पर 20 किमी प्रति घंटा और पानी के भीतर 37 किमी प्रति घंटा तक पहुंच जाती है।
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हथियारों से लैस, दुश्मन के लिए काल
INS कलवरी में 6 टॉरपीडो ट्यूब (533 मिमी) लगे हैं। यह 18 टॉरपीडो या SM-39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल दाग सकती है। इसके अलावा यह 30 नौसैनिक माइंस बिछाने में भी सक्षम है। इसमें एंटी-टॉरपीडो काउंटरमेजर्स सिस्टम भी मौजूद है, जो दुश्मन के हमले से बचाव करता है।





