Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस वर्ष अधिक मास (मलमास) का संयोग बन रहा है। अंग्रेजी कैलेंडर में जहां साल 12 महीनों का होता है, वहीं हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है। इसी गणना के कारण हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। 2026 में हिंदू नववर्ष 12 की बजाय 13 महीनों का होगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
मलमास क्यों पड़ता है? जानिए ज्योतिषीय कारण
चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बढ़ता जाता है। तीन वर्षों में यही अंतर करीब एक महीने का हो जाता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी को अधिक मास या मलमास कहा जाता है, ताकि ऋतुओं और त्योहारों का संतुलन बना रहे।
मलमास से पुरुषोत्तम मास बनने की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, पहले इस महीने को मलमास कहा जाता था और इसे अशुभ माना जाता था। कोई भी देवता इस महीने का अधिपति बनना नहीं चाहता था। दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास पहुंचा। तब भगवान विष्णु ने इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ नाम दिया और वरदान दिया कि इस महीने की गई भक्ति, जप और दान का फल कई गुना मिलेगा। तभी से यह महीना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
अधिक मास 2026 की तिथि: कब से कब तक रहेगा?
पंचांग के अनुसार अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इस दौरान पहले दिन व्रत रखना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
अधिक मास में क्या करें और क्या न करें?
अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। माना जाता है कि इन कार्यों का पूरा फल नहीं मिलता। वहीं दूसरी ओर, भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप-तप, ध्यान, गीता-रामायण पाठ, गौ सेवा और दान-पुण्य करना बेहद शुभ होता है। शास्त्रों के अनुसार, अधिक मास में किया गया एक दिन का पुण्य सामान्य दिनों के 100 दिनों के बराबर फल देता है।
पुण्य कमाने का सुनहरा अवसर
अधिक मास आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय है। जो भक्त इस महीने को भक्ति और संयम से बिताते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।





