महाराष्ट्र पुलिस को जल्द ही नया पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल सकता है। 1990 बैच के तेज-तर्रार IPS अधिकारी सदानंद वसंत दाते को राज्य का अगला DGP बनाए जाने की पूरी संभावना है। केंद्र सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) के महानिदेशक पद से हटाकर उनके मूल कैडर महाराष्ट्र भेजने का फैसला किया है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दे दी है।
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 22 दिसंबर 2025 को आधिकारिक आदेश जारी किया। इसके तहत IPS सदानंद दाते अब NIA DG नहीं रहेंगे और महाराष्ट्र कैडर में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। इस फैसले की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, कैबिनेट सचिवालय और महाराष्ट्र सरकार को भी दे दी गई है।
26/11 हमले में दिखाई थी बहादुरी
IPS सदानंद दाते वही अधिकारी हैं जिन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान आतंकवादी अजमल कसाब और अबू इस्माइल का डटकर सामना किया था। उस समय दाते Cama Hospital के पास पहुंचे थे, जहां महिलाओं और बच्चों का अस्पताल था। उन्हें अंदेशा था कि आतंकी यहां बंधक बना सकते हैं, इसलिए बिना देर किए वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
गोलियों और ग्रेनेड के बीच डटे रहे
26 नवंबर 2008 की रात करीब 9:30 बजे जब मुंबई दहल उठा, तब यह इलाका दाते के अधिकार क्षेत्र में नहीं था, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा। वे मालाबार हिल स्थित अपने घर से निकले, रास्ते में पुलिस स्टेशन से कार्बाइन हथियार लिया और छह जवानों के साथ अस्पताल पहुंचे। छत से आतंकियों को फायरिंग करते देख उन्होंने जवाबी कार्रवाई की।
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घायल होने के बाद भी बचाईं कई जानें
जब दाते अस्पताल में घुसने की कोशिश कर रहे थे, तभी कसाब द्वारा फेंका गया ग्रेनेड मात्र तीन फीट की दूरी पर फटा। इस हमले में सब-इंस्पेक्टर प्रकाश मोरे शहीद हो गए और दाते समेत तीन अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद सदानंद दाते ने मोर्चा नहीं छोड़ा। उन्होंने करीब 40 मिनट तक आतंकियों को अस्पताल में घुसने से रोके रखा, जिससे कई मरीजों और स्टाफ की जान बच गई।





