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चीखल्दा बुजुर्ग में श्री राम जन्मोत्सव कथा से उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
भौंरा । विकासखंड शाहपुर के ग्राम चीखल्दा बुजुर्ग स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में चल रही श्री राम कथा एवं श्री राम यज्ञ के क्रम में रविवार को प्रभु श्री राम जन्मोत्सव की कथा का भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया गया। जम्मू-कश्मीर से पधारे प्रख्यात रामकथावाचक श्री कुसुम हिंदू जी रामायणी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के अवतरण की दिव्य कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथावाचन में बताया गया कि भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम का जन्म त्रेता युग में धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए हुआ।
सूर्यवंशी राजा दशरथ की संतान-प्राप्ति की इच्छा पर कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के मार्गदर्शन में पुत्रेष्टि यज्ञ संपन्न हुआ।
यज्ञ से प्राप्त दिव्य खीर के सेवन से रानियों को गर्भधारण हुआ। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र में माता कौशल्या के गर्भ से प्रभु श्री राम का जन्म हुआ, वहीं अन्य रानियों को भी पुत्र-रत्न की प्राप्ति हुई। कथावाचक ने आगे बताया कि जन्म के पश्चात कुलगुरु वशिष्ठ ने चारों बालकों के गुण और स्वभाव के अनुरूप उनका नामकरण संस्कार किया। श्री राम को शांत, वीर, न्यायप्रिय और करुणामय स्वभाव का प्रतीक बताया गया, जबकि लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को भी उनके-उनके गुणों के अनुरूप नाम प्राप्त हुए। श्री राम बचपन से ही धर्मपरायण, सत्यनिष्ठ और मर्यादाओं के पालनकर्ता रहे, इसी कारण वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। कथा में यह भी वर्णित किया गया कि माता कौशल्या को पहले भगवान के चतुर्भुज रूप के दर्शन हुए, तत्पश्चात प्रभु ने बालक रूप धारण किया।
उपदेशों में संत श्री कुसुम हिंदू जी रामायणी ने कहा कि राम का जीवन आदर्श आचरण, कर्तव्यनिष्ठा और करुणा का मार्गदर्शक है, जिसे अपनाकर समाज में समरसता और न्याय स्थापित किया जा सकता है। सुंदर संगीतमय भजनों के साथ प्रस्तुत कथा ने श्रद्धालुओं को गहरी आध्यात्मिक अनुभूति कराई।




