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महायज्ञ से जागृत हो रही सामूहिक चेतना, आत्मकल्याण का हो रहा महाअनुष्ठान
शास्त्रीय विधि से संपन्न हो रहा 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ
आमला। शक्ति संवर्धन 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन पूर्णतः शास्त्रीय और वैदिक विधान के अनुरूप किया जा रहा है। यज्ञ की प्रत्येक प्रक्रिया को सूक्ष्म नियोजन के साथ संयोजित किया गया है, जिससे साधना की प्रभावशीलता और आध्यात्मिक ऊर्जा का विस्तार सुनिश्चित हो सके। महायज्ञ में एक कुंड पर 10 यजमानों को बैठाया गया है, जो यज्ञाचार्यों के सान्निध्य में मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां अर्पित कर रहे हैं। एक चरण में 108 कुंडों पर कुल 1080 आहुतियां समर्पित की जा रही हैं। यज्ञाग्नि में समर्पण की यह प्रक्रिया निरंतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह उत्पन्न कर रही है। यज्ञ मंडप में अनुशासन, शुचिता और साधना का वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस प्रकार का शास्त्रीय आयोजन दुर्लभ होता है। पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा रहा है।
एक पाली में 25 हजार से अधिक आहुतियों से बना ऊर्जा का विराट प्रवाह
महायज्ञ की प्रत्येक पाली में आहुतियों की संख्या अपने आप में विशेष महत्व रखती है। आयोजकों के अनुसार एक पाली में कुल 25 हजार 920 आहुतियां यज्ञाग्नि को समर्पित की जा रही हैं। यह विशाल संख्या यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक साधना का महापर्व बना रही है। यज्ञाचार्य प्रत्येक यजमान को विधिवत मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुति देने का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आहुतियों के साथ संकल्प, भावना और अनुशासन का समन्वय यज्ञ की प्रभावशीलता को और बढ़ा रहा है। साधकों का कहना है कि इस प्रक्रिया से मन की शुद्धि और चेतना का जागरण होता है। यज्ञ की अग्नि में समर्पण से वातावरण में शांति और सकारात्मकता का विस्तार हो रहा है। आमला क्षेत्र में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
तीन दिनों में पांच लाख से अधिक आहुतियों का दुर्लभ संयोग
तीन दिवसीय इस महायज्ञ में प्रतिदिन 1 लाख 29 हजार 600 आहुतियां डाली जा रही हैं। इस प्रकार तीन दिनों में आहुतियों की कुल संख्या पांच लाख से अधिक पहुंच जाएगी, जिसे अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली माना जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में आहुतियों से साधना की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। यह महायज्ञ केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि आमला क्षेत्र की सामूहिक चेतना को गहराई से प्रभावित करेगा। यज्ञ के माध्यम से लोकमंगल, सद्भाव और शांति की कामना की जा रही है। धर्माचार्यों ने इसे वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है। श्रद्धालुओं ने महायज्ञ को आत्मिक अनुभव से जोड़ने वाला बताया। आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया है।
रात्री के दीप विराठ महायज्ञ में सम्मिलित होगे राज्य केन्द्रीय राज्य मंत्री
दीप विराठ महायज्ञ मे डॉ चिन्मय पण्ड्याजी के द्वारा विशिष्ट उद्बोधन में केन्द्रीय राज्य मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद डी.डी. उइके एंव प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल, घोड़ाडोंगरी विधायक, एवं पुर्व केबीनेट मंत्री सुखदेव पांसे शामिल होंगे। I





