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भारत का चक्रव्यूह और ड्रैगन की फिसलती चाल

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जब चीन हिंद महासागर में अपनी दखल बढ़ाने की कोशिशों में लगा है, उसी वक्त भारत ने बंगाल की खाड़ी में एक बेहद चुपचाप लेकिन असरदार रणनीति अपनाई। भारत ने पहले नो फ्लाई जोन का नोटम जारी किया और फिर आखिरी समय में उसे रद्द कर दिया। ऐसा एक बार नहीं, बल्कि तीन बार किया गया। हर बार जैसे ही नोटम आया, चीन ने अपने जासूसी जहाज उसी इलाके में भेज दिए। इससे साफ हो गया कि भारत की हर रणनीतिक चाल पर चीन की नजर टिकी हुई है।

नोटम क्या होता है और क्यों बढ़ा शक

नोटम यानी नोटिस टू एयरमेन, जिसके जरिए पायलटों को किसी खास हवाई क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी दी जाती है। नवंबर के आखिरी हफ्ते में भारत ने ओडिशा के चांदीपुर से विशाखापत्तनम तक करीब 3500 किलोमीटर लंबे इलाके के लिए नोटम जारी किया। इतना बड़ा इलाका देखकर कयास लगाए गए कि भारत किसी बड़ी मिसाइल का परीक्षण करने वाला है। रक्षा जानकारों के मुताबिक यह के चार मिसाइल हो सकती है, जो परमाणु क्षमता से लैस और करीब 3500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है।

चीन के जासूसी जहाज कैसे फंसे

भारत के नोटम जारी होते ही चीन ने अपना रिसर्च जहाज लान हाई 101 हिंद महासागर में भेज दिया। पहले से मौजूद शी यान 6, शेन हाई यी हाओ और लान हाई 201 जैसे जहाज भी सक्रिय हो गए। ये सभी जहाज ड्यूल यूज माने जाते हैं, यानी समुद्री रिसर्च के साथ साथ मिसाइल ट्रैकिंग और जासूसी में भी सक्षम होते हैं। लेकिन भारत ने ऐन वक्त पर नोटम रद्द कर दिया और चीन की चाल खुलकर सामने आ गई।

पाकिस्तान को भी रखा गया अलर्ट मोड में

इसी दौरान भारत ने अरब सागर में कराची के बेहद पास एयरफोर्स एक्सरसाइज का नोटिफिकेशन जारी किया। इससे पाकिस्तान भी सतर्क हो गया। यानी एक तरफ बंगाल की खाड़ी में चीन उलझा रहा, तो दूसरी तरफ अरब सागर में पाकिस्तान को भी भारत ने व्यस्त रखा। यह साफ दिखाता है कि भारत एक साथ कई मोर्चों पर रणनीतिक दबाव बनाने में सक्षम है।

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क्या यही है भारत की मास्टर प्लानिंग

दिसंबर में भारत ने फिर से बंगाल की खाड़ी के लिए नया नोटम जारी किया, पहले 2250 किलोमीटर और फिर 3550 किलोमीटर तक बढ़ाया गया। चीन फिर से जाल में फंस गया और दा यांग यी हाओ नाम का पांचवां जहाज भी भेज दिया। लेकिन भारत ने एक बार फिर आखिरी समय में नोटम रद्द कर दिया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जानबूझकर ऐसा कर रहा है ताकि चीनी जहाजों की प्रतिक्रिया, गति और ऑपरेशन क्षमता को बारीकी से समझा जा सके। यही भारत का असली चक्रव्यूह है, जिसमें ड्रैगन खुद फंसता चला जा रहा है।

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