Bangladesh Violence: बांग्लादेश में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पूरे देश में हिंसा भड़क उठी है। इंक़लाब मंच के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं, सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ हो रही है और आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं। हर तरफ एक ही नाम गूंज रहा है – उस्मान हादी। लेकिन सवाल ये है कि आखिर उस्मान हादी कौन था, जिसकी मौत ने पूरे बांग्लादेश को हिला दिया।
कौन था शरीफ उस्मान हादी
32 साल का शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश की राजनीति में तेजी से उभरता हुआ नाम था। वह कट्टरपंथी संगठन इंक़लाब मंच का प्रमुख चेहरा और प्रवक्ता माना जाता था। पिछले साल जुलाई में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए, तब उस्मान हादी सबसे आगे नजर आया। वह मंच से भड़काऊ भाषण देता था और सरकार विरोधी आंदोलनों की अगुवाई करता था।
शेख हसीना के लिए क्यों बना सिरदर्द
उस्मान हादी का असर युवाओं में काफी गहरा था। इंक़लाब मंच के जरिए उसने सरकार के खिलाफ माहौल तैयार किया। हालात इतने बिगड़ गए कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आंदोलनों में उस्मान हादी की भूमिका बेहद अहम रही। वह 2026 में होने वाले आम चुनाव में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने की तैयारी में था।
भारत विरोधी बयानों से रहा चर्चा में
उस्मान हादी सिर्फ सरकार विरोधी नहीं था, बल्कि खुलेआम भारत विरोधी बयान देने के लिए भी जाना जाता था। वह खुद को बांग्लादेश का कट्टर भारत विरोधी नेता बताता था। उसने अवामी लीग और नेशनलिस्ट पार्टी को चेतावनी दी थी कि भारत समर्थक राजनीति अब नहीं चलेगी। इतना ही नहीं, हाल ही में उसने ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का एक विवादित नक्शा भी जारी किया था, जिसमें भारत के कुछ हिस्सों को शामिल दिखाया गया था।
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मौत के बाद क्यों भड़की हिंसा
उस्मान हादी की मौत के बाद उसके समर्थकों में गुस्सा फूट पड़ा। इंक़लाब मंच के कार्यकर्ताओं ने इसे साजिश करार देते हुए सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई जगह सरकारी दफ्तरों और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। हालात ऐसे बन गए कि सुरक्षा बलों को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी। माना जा रहा है कि हादी की मौत ने बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर अस्थिरता की ओर धकेल दिया है।
कुल मिलाकर, शरीफ उस्मान हादी एक ऐसा नाम था जिसने कम उम्र में ही बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया। उसकी मौत के बाद उठी हिंसा आने वाले दिनों में देश के लिए और भी बड़ी चुनौती बन सकती है।





