Health Tips: आज के समय में डायबिटीज एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। हर दूसरा व्यक्ति या तो इससे जूझ रहा है या इसके खतरे में है। लोग दवाइयों, जिम और डाइट पर खूब ध्यान देते हैं, लेकिन फिर भी शुगर कंट्रोल में नहीं रहती। आयुर्वेदिक और यूनानी विशेषज्ञ डॉ. सलीम ज़ैदी के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह हमारी रोज़ की थाली में छुपी है।
गेहूं को लेकर क्या कहते हैं डॉ. सलीम ज़ैदी
डॉ. सलीम ज़ैदी का कहना है कि आज का गेहूं सेहत का दोस्त नहीं बल्कि दुश्मन बन चुका है। लोग सोचते हैं कि मैदे से बचकर अगर गेहूं की रोटी खा ली तो बहुत हेल्दी हो गया, लेकिन सच्चाई कुछ और है। आज जो गेहूं हम खा रहे हैं, वह हाइब्रिड और केमिकल प्रोसेस्ड है, जिसमें पोषण नाम मात्र का रह गया है।
पुराने जमाने का गेहूं और आज का गेहूं
पहले के जमाने में जो देसी गेहूं होता था, उसमें भरपूर फाइबर, मिनरल्स और प्रोटीन होते थे। इससे पेट साफ रहता था और ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहती थी। लेकिन आज के गेहूं में सिर्फ स्टार्च और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट बचा है। इसमें मैग्नीशियम, जिंक और फाइबर लगभग खत्म हो चुके हैं, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद जरूरी होते हैं।
ग्लूटेन और शुगर बढ़ने का रिश्ता
डॉ. ज़ैदी के मुताबिक आज के गेहूं में ग्लूटेन बहुत ज्यादा होता है। यही ग्लूटेन पेट फूलने, गैस, एसिडिटी और पाचन की दिक्कत पैदा करता है। जब पाचन खराब होता है तो शरीर इंसुलिन को सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे शुगर लेवल बढ़ने लगता है। यही कारण है कि गेहूं डायबिटीज का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है।
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गेहूं की जगह क्या खाएं?
अगर आप सच में डायबिटीज से बचना चाहते हैं या शुगर कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो डॉ. सलीम ज़ैदी गेहूं की जगह मोटे अनाज यानी मिलेट्स खाने की सलाह देते हैं। ज्वार, बाजरा, रागी और कोदो जैसे अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं। ये धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता और शरीर लंबे समय तक एनर्जी में रहता है।
अगर आप अपनी थाली में थोड़ा सा बदलाव कर लें और गेहूं की मात्रा कम कर दें, तो डायबिटीज, मोटापा और पेट की कई बीमारियों से बचा जा सकता है।




