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PM Modi Oman Visit: 8 साल बाद ओमान पहुंचे PM मोदी, क्यों खास है यह दूसरा दौरा

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PM Modi Oman Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 साल के लंबे अंतराल के बाद ओमान की यात्रा पर पहुंचे हैं। यह दो दिवसीय दौरा ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद के निमंत्रण पर हो रहा है। इससे पहले पीएम मोदी साल 2018 में ओमान गए थे। इस बार का दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें भारत और ओमान के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर गहन बातचीत होने वाली है।

भारत के लिए ओमान क्यों है इतना अहम

ओमान भारत के लिए सिर्फ एक दोस्त देश नहीं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। ओमान पहला खाड़ी देश है, जिसके साथ भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं। समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। यही वजह है कि भारत-ओमान संबंधों को हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता का मजबूत आधार माना जाता है।

रक्षा सहयोग और जगुआर फाइटर जेट का कनेक्शन

पीएम मोदी की इस यात्रा में रक्षा सहयोग एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। ओमान के पास मौजूद जगुआर फाइटर जेट अब अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं और वहां की वायुसेना इन्हें सेवा से हटाने की तैयारी में है। ऐसे में ओमान ने भारत को इन विमानों के स्पेयर पार्ट्स देने का प्रस्ताव रखा है। अगर यह समझौता होता है, तो भारतीय वायुसेना के जगुआर जेट्स को उड़ान में बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बदलेगा कारोबारी रिश्ता

पीएम मोदी का ओमान दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत आगे बढ़ सकती है। इस समझौते के तहत कस्टम ड्यूटी कम या खत्म की जा सकती है, जिससे व्यापार को बड़ा फायदा होगा। भारत पहले ही यूएई के साथ ऐसा समझौता कर चुका है और ओमान इस सूची में शामिल होने वाला दूसरा GCC देश बन सकता है। भारत ओमान को बड़ी मात्रा में दवाइयां, मशीनरी और खाद्य उत्पाद निर्यात करता है।

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ग्लोबल साउथ और कूटनीतिक रिश्तों में मजबूती

ओमान, खाड़ी सहयोग परिषद और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन का अहम सदस्य है। भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान ओमान को विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया था, जो दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को दिखाता है। पीएम मोदी की यह यात्रा ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगी और ऊर्जा सुरक्षा से लेकर समुद्री सहयोग तक कई नए रास्ते खोलेगी।

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