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रानीपुर: मूंग विवाद के बाद उसी वेयरहाउस में धान खरीदी शुरू

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खबरवाणी

रानीपुर: मूंग विवाद के बाद उसी वेयरहाउस में धान खरीदी शुरू

2200 बोरीअमानक मूंग खरीदी पर नहीं हुई कार्रवाई न जांच की सार्वजनिक… फिर भी केंद्र चालू

रानीपुर।
2200 बोरी अमानक मूंग के विवाद के बाद भी रानीपुर स्थित गायत्री वेयरहाउस में धान खरीदी केंद्र दोबारा शुरू कर दिया गया है। खरीदी शुरू होते ही 800 से 900 किसानों का पंजीयन हुआ है, लेकिन मूंग प्रकरण की जांच पूरी न होने के कारण किसानों में नाराजगी और आशंका बनी हुई है।

गंभीर सवाल यह है कि जब मूंग प्रकरण में न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न किसी अधिकारी पर जिम्मेदारी तय की गई, तो उसी वेयरहाउस पर दोबारा खरीदी क्यों शुरू कर दी गई। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो खरीदी प्रक्रिया पर भरोसा खत्म हो जाएगा।

मामले के पीछे की स्थिति यह है कि कुछ माह पहले इसी वेयरहाउस में 2200 बोरी मूंग जांच में अमानक पाई गई थी। इसके बाद यह कहकर मामला शांत कर दिया गया कि “तीन दिन में पंखा चलाकर मूंग मानक बना ली गई।” लेकिन इस दावे से जुड़ी कोई आधिकारिक रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है।

अधिकारियों के बयान

जिला आपूर्ति अधिकारी (डीएसओ) कृष्ण कुमार टेकाम ने कहा —> “वेयरहाउस मैनेजर द्वारा भेजी गई सूची के आधार पर ही खरीदी केंद्र का चयन किया गया है।”

 

वेयरहाउस जिला प्रबंधक एन.पी. कीर ने स्पष्ट किया —> “मेरे पास उपलब्ध खाली वेयरहाउसों की सूची जिला समिति को भेजी जाती है। डीएमओ समिति के सदस्य हैं, उन्हें आपत्ति उठानी थी।”

डीएमओ प्रदीप ग्रेवाल ने बताया कि पुराने डीएमओ जांच करके गए थे पंचनामा फोटो वीडियो है वह मीडिया को बताएंगे

डीएमओ के बयान से खड़े हुए कई सवाल।

डीएमओ प्रदीप ग्रेवाल के अमानक मूंग को मानक करते समय पंचनामा और वीडियो फोटोग्राफ उपस्थित है तो यह बात तो सही है की 2200 बोरी अमानक मूंग खरीदी इस वेयरहाउस में हुई थी जो गलती से भी नहीं हुई थी है। फिर वेयरहाउस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ।

सूत्र बताते हैं कि अभी भी इस वेयरहाउस में संतोषपूर्ण मूंग उपस्थित नहीं है जिसकी जांच टीम गठित करके जांच किए जाने पर सही जानकारी सामने आएंगे
धान खरीदी अब शुरू हो चुकी है, लेकिन मूंग मामले का सच सामने न आने से किसानों के मन में संदेह बना हुआ है। स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि मूंग प्रकरण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो, तभी खरीदी प्रक्रिया पर भरोसा बहाल हो सकता है।

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