बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने दावा किया है कि विपक्षी महागठबंधन के कई विधायक एनडीए के संपर्क में हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है। पासवान ने कहा कि कई विधायक खुद आगे बढ़कर एनडीए से जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं, क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं।
कई विधायक एनडीए में आने को तैयार: चिराग
पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या कांग्रेस के कम से कम चार विधायक जेडीयू के संपर्क में हैं, तो चिराग पासवान ने किसी पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि यह सच है कि विपक्ष के कई विधायक एनडीए में आने को तैयार बैठे हैं। उन्होंने कहा कि विधायक अब समझ चुके हैं कि असली विकास और जनता की सेवा मोदी जी के नेतृत्व में ही संभव है। इसी वजह से विपक्षी खेमे में असंतोष बढ़ रहा है और कई लोग अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एनडीए का रुख कर रहे हैं।
कांग्रेस का पलटवार—दावा झूठ, अफवाह फैलाने का प्रयास
चिराग के बयान के बाद कांग्रेस ने तुरंत पलटवार करते हुए इसे अफवाह करार दे दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि ऐसी बातें हर चुनाव के बाद उड़ाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में भी इसी तरह की बातें फैलाई गई थीं, लेकिन हमारे सभी 19 विधायक हमारे साथ खड़े रहे। इस बार भी कांग्रेस के विधायक कहीं नहीं जा रहे। उन्होंने एनडीए पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
बहुमत के साथ सत्ता में है एनडीए, विपक्ष में तनाव बढ़ा
हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस सिर्फ छह सीटों पर सिमट गई। ऐसे में चिराग के दावे से विपक्ष में बेचैनी और सत्ता पक्ष में आत्मविश्वास और बढ़ गया है। माना जा रहा है कि यदि कुछ भी राजनीतिक हलचल होती है तो इसका सीधा असर प्रदेश की राजनीति और सरकार की स्थिरता पर पड़ेगा।
संसद और विधानसभा सत्र से पहले हलचल तेज
चिराग पासवान ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि विपक्ष न तो खुद कोई सकारात्मक काम करता है और न ही सरकार को करने देता है। उन्होंने कहा कि संसद का नया सत्र कल से शुरू हो रहा है और हमें फिर से हंगामे की आशंका है। बिहार विधानसभा सत्र भी जल्द शुरू होने वाला है और वहां भी विपक्ष के बवाल की संभावना है। चिराग के बयान ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई विपक्षी विधायक पाला बदलेंगे या यह सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।





