Sunderkand Path:हनुमान भक्तों के लिए सुंदरकांड पाठ का विशेष महत्व है। जैसे हनुमान चालीसा का पाठ शुभ माना जाता है, वैसे ही सुंदरकाण्ड का पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि और हर काम में सफलता मिलती है। अगर आप बजरंगबली की कृपा पाने के लिए सुंदरकांड पढ़ने की सोच रहे हैं, तो इसके नियम, शुभ तिथि और सही विधि जान लेना जरूरी है।
सुंदरकांड क्या है? जानें इसका महत्व
सुंदरकांड श्रीरामचरितमानस का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। इसमें हनुमानजी की लंका यात्रा, माता सीता से भेंट, लंका दहन और उनके पराक्रम का वर्णन है। तुलसीदासजी ने सुंदरकांड में हनुमानजी की भक्ति, शक्ति और बुद्धि का अद्भुत चित्रण किया है। इसे पढ़ने से व्यक्ति के मन में आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा का संचार होता है।
सुंदरकांड पाठ के नियम – कैसे करें शुभ शुरुआत
सुंदरकांड पाठ हमेशा स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर और पवित्र मन से शुरू करना चाहिए।
- पूजा स्थान पर साफ आसन बिछाएँ।
- हनुमानजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- राम दरबार का चित्र साथ रखें।
- चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमानजी को चोला लगाएँ।
- घी का दीपक जलाएँ।
- सबसे पहले भगवान गणेश, शिव, श्रीराम और फिर हनुमानजी का आह्वान करें।
इसके बाद पूरी श्रद्धा और भक्ति से सुंदरकांड का पाठ शुरू करें। अंत में आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
सुंदरकांड पाठ के लाभ – हर कष्ट का नाश
सुंदरकांड पाठ करने से जीवन के कई संकट दूर होते हैं।
- मन में आत्मविश्वास बढ़ता है।
- व्यापार और नौकरी में प्रगति मिलती है।
- घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
- शनि दोष, साढ़ेसाती और राहु-केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
- मानसिक शांति, धन लाभ और सौभाग्य प्राप्त होता है।
कहा जाता है कि भोलेनाथ और श्रीराम की कृपा के साथ बजरंगबली अपने भक्तों की हर इच्छा पूर्ण करते हैं।
हनुमानजी के रुष्ट होने के संकेत – पहचानें ये लक्षण
अगर बजरंगबली प्रसन्न नहीं हैं, तो इसके कुछ संकेत दिखने लगते हैं —
- सपने में बार-बार बंदर दिखना
- कामों का बार-बार बिगड़ना
- घर में कलह या नेगेटिव ऊर्जा बढ़ना
- बिना कारण नुकसान या कर्ज बढ़ना
ऐसे में सुंदरकांड पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
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सुंदरकांड पाठ का शुभ दिन – कब करें पाठ?
हनुमानजी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार सबसे शुभ माने जाते हैं। इन दिनों सुंदरकांड पाठ करने से कई गुना लाभ मिलता है।
इसके अलावा—
- पूर्णिमा
- एकादशी
- हनुमान जयंती
इन तिथियों पर पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
कुछ दिनों में पाठ से बचें:
- अमावस्या को सुंदरकांड पाठ नहीं करना चाहिए।
- देर रात सुंदरकांड पढ़ना भी अशुभ माना जाता है।






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