BJP : लखनऊ से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। आज राजधानी में आज़ादी की वीरांगना ऊदा देवी पासी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया। मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। यह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसे 2027 की यूपी राजनीति का बड़ा संदेश माना जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन BJP MLC रामचंद्र प्रधान द्वारा किया गया, जो कभी मायावती के बेहद करीबी माने जाते थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी दलित समाज, खासकर पासी समुदाय को लेकर नए राजनीतिक तेवर में दिख रही है।
पासी समाज पर राजनीतिक फोकस बढ़ा
उत्तरी भारत में दलित समाज के भीतर पासी समुदाय की मजबूत पकड़ मानी जाती है। BSP की राजनीति में भी यह जाति लंबे समय तक मुख्य आधार रही है। लेकिन ऊदा देवी पासी की प्रतिमा स्थापना ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि दलित नायकों का सम्मान BJP कर रही है। बीजेपी का मकसद साफ है कि वह पासी समुदाय को अपने साथ जोड़कर दलित वोट बैंक पर मजबूत पकड़ बनाना चाहती है।
PDA राजनीति को करारा जवाब
अखिलेश यादव इन दिनों PDA यानी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक की राजनीति के जरिए बड़ा वोट गठजोड़ बनाने की रणनीति में हैं। लेकिन लखनऊ के इस आयोजन से यह राजनीतिक संकेत निकला है कि बीजेपी अब दलित प्रतीकों और गौरवशाली नायकों को सामने रखकर PDA चुनौती का जवाब देने की तैयारी कर रही है। पासी समाज का झुकाव यदि BJP की ओर बढ़ा, तो SP की PDA राजनीति को बड़ा झटका लग सकता है।
बसपा को बड़ा मैसेज
मायावती की BSP ने लंबे समय तक दलित राजनीति की कमान संभाली, लेकिन इस कार्यक्रम को राजनीतिक जानकार BSP के लिए एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। रामचंद्र प्रधान जैसे पुराने बसपाई नेता का इस कार्यक्रम में मुख्य भूमिका निभाना यह दिखाता है कि दलित राजनीति का केंद्र धीरे-धीरे बदल रहा है।
BJP का दलित प्राइड कैंपेन
बीजेपी पिछले कुछ समय से दलित आइकन को आगे लाकर दलित प्राइड अभियान चला रही है। ऊदा देवी पासी की मूर्ति स्थापना इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी का प्रयास है कि विकास की राजनीति के साथ सामाजिक सम्मान की राजनीति भी मजबूत रहे।
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चुनावी जंग से पहले बड़ा संकेत
लखनऊ का यह आयोजन सिर्फ प्रतिमा का अनावरण नहीं था, बल्कि 2027 की लड़ाई से पहले दलित वोट बैंक पर मजबूत पकड़ बनाने की बड़ी चाल थी। बीजेपी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि दलित समाज अब उसकी बड़ी राजनीतिक प्राथमिकता है और वह किसी भी कीमत पर इसे हाथ से जाने नहीं देना चाहती।






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