Indian Army Akhand Prahar Exercise: भारतीय सेना इस समय ‘अखंड प्रहार’ नामक युद्धाभ्यास के जरिए अपनी ताकत का जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है। यह अभ्यास न सिर्फ दुश्मनों को चेतावनी है बल्कि यह दिखाता है कि भारत अब निर्णायक युद्ध की स्थिति में भी बढ़त हासिल करने में सक्षम है। दक्षिणी कमान के नेतृत्व में चल रहा यह युद्धाभ्यास आत्मनिर्भर भारत की नई रक्षा नीति और आधुनिक युद्ध कौशल का प्रतीक बन चुका है।
थार के रेगिस्तान से गूंजा भारत का दम
‘अखंड प्रहार’ अभ्यास राजस्थान के तपते थार रेगिस्तान में आयोजित किया गया। यहां भारतीय थलसेना ने टैंकों, तोपों और हेलीकॉप्टरों के साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान सेना ने दिखाया कि कैसे भारत अब हर मोर्चे पर तैयार है – चाहे ज़मीन हो, हवा हो या तकनीक। इस एक्सरसाइज का मकसद पाकिस्तान और चीन दोनों को स्पष्ट संदेश देना है कि भारत अब केवल बचाव नहीं, बल्कि जवाब देने में भी पूरी तरह सक्षम है।
सेना और वायुसेना का जबरदस्त तालमेल
इस अभ्यास की समीक्षा दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने की। उन्होंने कोणार्क कोर की तैयारियों का निरीक्षण करते हुए कहा कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धों के लिए “पूरी तरह तैयार और निर्णायक रूप से सक्षम” है। इस दौरान वायुसेना और थलसेना का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। फाइटर ग्राउंड अटैक मिशन, हेलिबॉर्न ऑपरेशन और रूद्र ब्रिगेड की जमीनी रणनीति ने भारत की “इंटीग्रेटेड वारफेयर” क्षमता को दुनिया के सामने रखा।
स्वदेशी हथियारों और ड्रोन की ताकत
इस अभ्यास में भारतीय सेना ने स्वदेशी ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) तकनीक का भी इस्तेमाल किया। इससे भारत की युद्ध क्षमता में तकनीकी बढ़त तो मिली ही, साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। इन तकनीकों ने निगरानी, टारगेट पहचान और नियंत्रण में अभूतपूर्व सटीकता दी।
भारत की नई रणनीतिक सोच
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने कहा कि ‘अखंड प्रहार’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “भारत अब युद्ध से नहीं डरता, बल्कि युद्ध की तैयारी कर शांति सुनिश्चित करता है।” रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभ्यास भारत की रणनीतिक सोच में बड़ा बदलाव लाता है — जहां पारंपरिक युद्ध की जगह अब डेटा आधारित, नेटवर्क-सक्षम और मल्टी-डोमेन युद्ध ने ली है।
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इंडो-पैसिफिक में भी भारत की बढ़ेगी पकड़
‘अखंड प्रहार’ के जरिए भारत ने दुनिया को दिखा दिया कि वह अब केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी अपनी रणनीतिक बढ़त हासिल करने की स्थिति में है। यह अभ्यास इस बात का प्रतीक है कि भारत आत्मनिर्भर, सशक्त और आधुनिक सैन्य शक्ति के रूप में उभर चुका है।





