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GPS Spoofing क्या है? कैसे एक ‘फेक सिग्नल’ हवाई जहाज़ों को बना सकता है खतरे का निशाना

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GPS Spoofing: हाल ही में दिल्ली के ऊपर उड़ान भर रहे यात्री विमानों में GPS स्पूफिंग की समस्या देखने को मिली। यह समस्या इतनी गंभीर हो गई कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान की सही लोकेशन तक नहीं मिल पा रही थी। इस घटना के बाद सभी एयरलाइंस और DGCA सतर्क हो गए हैं। आइए जानते हैं आखिर GPS Spoofing क्या है, यह कैसे काम करता है और इसके खतरे कितने गंभीर हो सकते हैं।

क्या होता है GPS Spoofing?

सरल शब्दों में, GPS Spoofing एक साइबर अटैक तकनीक है जिसमें किसी विमान, वाहन या जहाज़ को फर्जी GPS सिग्नल भेजे जाते हैं।
इन नकली सिग्नल्स की वजह से सिस्टम को गलत लोकेशन दिखाई देती है और विमान अपनी असली दिशा से भटक सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल युद्ध के समय ड्रोन या निगरानी प्रणालियों को भ्रमित करने के लिए किया जाता है।
हालांकि, एयरलाइंस के पास बैकअप सिस्टम जैसे Inertial Reference System (IRS) होते हैं, जो GPS फेल होने पर स्थिति संभाल सकते हैं।

यह तकनीक कितनी खतरनाक हो सकती है?

जब कोई विमान उड़ान भरता है, तो वह निर्धारित एयर रूट पर चलता है — ठीक वैसे ही जैसे सड़क पर गाड़ियाँ अपने-अपने लेन में चलती हैं।
यदि किसी वजह से विमान की दिशा या लोकेशन गलत दिखने लगे, तो टकराव (Collision) का खतरा बढ़ सकता है।
GPS Spoofing के कारण विमान का अन्य विमानों से दूरी का अनुमान गलत हो सकता है, जिससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
इसके अलावा, लैंडिंग और टेकऑफ के समय भी विमान की नेविगेशन गड़बड़ा सकती है, जिससे स्थिति और खतरनाक हो सकती है।

भारत में कहाँ-कहाँ देखने को मिली है यह समस्या

GPS Spoofing जैसी घटनाएँ पहले भी भारत-Myanmar और भारत-Pakistan सीमा के पास देखी गई थीं।
लेकिन हाल ही में यह समस्या दिल्ली एयरस्पेस में देखने को मिली, जो बेहद चिंता का विषय है क्योंकि यहां रोज़ाना सैकड़ों फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं।
एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऐसी घटनाएँ बढ़ती हैं, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा और यात्री सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बन सकती हैं।

DGCA ने जारी की एडवाइजरी

2023 में DGCA ने एयरलाइंस को एक अधिसूचना (Advisory) जारी की थी, जिसमें सभी एयरलाइनों को GPS Spoofing से जुड़ी घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।
अब दिल्ली में समस्या सामने आने के बाद DGCA ने एक बार फिर चेतावनी जारी की है और कहा है कि पायलट्स को GPS में किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित करना होगा।

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कैसे करें इससे बचाव?

विशेषज्ञों के मुताबिक, हवाई जहाज़ों और ड्रोन सिस्टम्स में एंटी-स्पूफिंग सॉफ्टवेयर और मल्टी-लेयर नेविगेशन सिस्टम को और मज़बूत करना होगा।
साथ ही, साइबर सिक्योरिटी मॉनिटरिंग को भी बढ़ाने की जरूरत है ताकि कोई भी फर्जी सिग्नल रियल टाइम में पहचाना जा सके।
सरकार और एविएशन एजेंसियाँ अब इस दिशा में काम कर रही हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और ऐसे साइबर अटैक का प्रभाव कम किया जा सके।

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