America News: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, रूस और चीन के पास इतनी परमाणु ताकत है कि वे इस धरती को 150 बार नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब “परमाणु निशस्त्रीकरण” यानी denuclearization पर गंभीरता से कदम उठाया जाए। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि हाल ही में ट्रंप ने अमेरिका में 30 साल बाद फिर से nuclear testing शुरू करने का ऐलान किया था।
ट्रंप बोले – ‘परमाणु हथियार अब फिजूलखर्ची हैं’
डोनाल्ड ट्रंप ने एक भीड़ भरी मीटिंग में कहा कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से परमाणु निरस्त्रीकरण पर बातचीत की है।
उन्होंने कहा – “दुनिया के पास पहले से ही इतनी ज्यादा परमाणु ताकत है कि अब और हथियार बनाना बेकार है। अमेरिका नंबर वन है, रूस दूसरे नंबर पर है और चीन तीसरे पर, लेकिन चीन पिछले चार–पांच सालों से तेजी से हथियार बना रहा है।”
“हम धरती को 150 बार उड़ा सकते हैं, पर जरूरत नहीं”
ट्रंप ने आगे कहा, “हम इस धरती को 150 बार उड़ा सकते हैं, लेकिन इसकी कोई जरूरत नहीं है। अब दुनिया को हथियारों पर पैसा खर्च करने की जगह लोगों की भलाई पर खर्च करना चाहिए।”
ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने पुतिन और जिनपिंग दोनों से इस मुद्दे पर बात की और सभी सहमत हैं कि यह धन कहीं और लगना चाहिए, जैसे विकास और जनकल्याण में।
अमेरिका, रूस और चीन के बीच परमाणु नियंत्रण की बात
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अमेरिका, रूस और चीन के बीच त्रिपक्षीय परमाणु नियंत्रण (trilateral nuclear control) की संभावनाओं पर भी चर्चा की है।
उन्होंने कहा – “हमने अपनी न्यूक्लियर आर्सेनल (nuclear arsenal) को फिर से मजबूत किया है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति है, और रूस दूसरे नंबर पर है। हालांकि चीन आने वाले चार–पांच सालों में हमें पकड़ सकता है।”
न्यूक्लियर टेस्टिंग पर यू-टर्न
ट्रंप का यह बयान उनके पुराने बयानों से उलट है। 30 अक्टूबर को उन्होंने 30 साल बाद अमेरिका में परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने की घोषणा की थी। उनका कहना था – “अगर दूसरे देश परीक्षण कर रहे हैं, तो हमें भी ऐसा करना होगा।”
उन्होंने Truth Social पर लिखा था कि उनके पहले कार्यकाल में अमेरिका के परमाणु हथियार पूरी तरह आधुनिकीकरण (modernized) हो चुके हैं।
विश्लेषक बोले – ‘ट्रंप की नीति में विरोधाभास’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के बयानों में विरोधाभास साफ नजर आता है। एक ओर वे denuclearization की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर नए परमाणु परीक्षण की घोषणा कर देते हैं।
अब देखना यह होगा कि पुतिन और जिनपिंग ट्रंप की इस “परमाणु शांति” पहल पर कितना भरोसा जताते हैं।





