नियमों को ताक पर रखकर शहर में लगाए गए पांच यूनिपोल का मामला पकड़ रहा तूल
वैध होर्डिंग में एडजस्ट किए 5 यूनिपोल
सीएमओ की मर्जी से निविदाओं की शर्तें बदल रहीं, परिषद को नहीं कोई जानकारी
सांध्य दैनिक खबरवाणी, बैतूल
सरकारी नियमों से छेड़छाड़ कर शासन के राजस्व को और स्वयं नगरपालिका परिषद बैतूल के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का षडय़ंत्र नगरपालिका परिषद सीएमओ सतीश मटसेनिया और राजस्व शाखा के माध्यम से किया जा रहा है। टेंडर क्रमांक रा.वि./हो.विज्ञा./ई-नि./ 2024-5709 दिनांक 13/9/2024 के अनुसार नगरीय क्षेत्र में चिन्हित किए गए कुल 91 होर्डिंग स्थल हेतु ई-निविदा आमंत्रित की गई थी, जिसमें 91 चिन्हित स्थलों का उल्लेख किया गया है। इस निविदा आमंत्रण के अनुसार उच्चतम बोली लगाने वाले निविदाकर्ता को 3 वर्ष के लिए होर्डिंग लगाने की अनुमति होगी। नगरपालिका परिषद में कार्यरत पदेन राजस्व उप निरीक्षक अखिल राय के अनुसार मध्यप्रदेश शासन के राजपत्र में होर्डिंग / यूनिपोल / साइन बोर्ड लिखा है, इसलिए 86 होर्डिंग और 5 यूनिपोल लगाए गए हैं जो कि नियमानुसार सही हैं यही नहीं जब उनसे पूछा गया कि निविदाकर्ता को अनुबंध निष्पादन हेतु जारी सूचना पत्र क्रमांक रा.वि./2025/1945 दिनांक 22/4/2025 की शर्त क्रमांक 1 के अनुसार 25 लाख 12 हजार 695 का ऑनलाइन भुगतान करना था जो कि नहीं किया गया और उसे किश्तों में बांट दिया गया है। इस पर भी उन्होंने कहा कि नियमानुसार ऐसा किया जा सकता है, अर्थात नगरपालिका परिषद अपने ही बनाए नियमों को मुख्य नगरपालिका अधिकारी की मर्जी से परिवर्तित कर सकती है भले ही उससे नगरपालिका को राजस्व की हानि हो। जब उनसे अनुबंध पत्र को पंजीयन कराने के संदर्भ में सवाल पूछा गया तो उन्होंंने जवाब दिया हमने उपपंजीयक महोदय से पंजीयन की राशि की जानकारी लेकर उतनी राशि के स्टॉम्प खरीदकर दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर कर रख लिए हैं, पंजीयन नहीं कराया गया है। किसी भी अनुबंध का जब पंजीयन कराया जाता है तो सिर्फ स्टॉम्प ही नहीं बल्कि शासन को पंजीयन शुल्क का भी भुगतान करना होता है, और पंजीयन शुल्क का भुगतान तभी संभव है जब अनुबंध का पंजीयन कराया जाए, जबकि टेंडर की शर्त 15 के अनुसार निविदाकर्ता को स्वयं के व्यय पर 7 दिवस के अंदर अनुबंध को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। टेंडर की शर्त क्रमांक 16 के अनुसार प्रस्तुत प्रस्ताव में स्वीकृत दरों एवं शर्तों में संशोधन का अधिकार नगरपालिका परिषद बैतूल को होगा, परंतु मुख्य नगरपालिका अधिकारी महोदय अधिकतर मामलों में नगरपालिका परिषद की अनुमति को जरूरी नहीं समझते। नगरपालिका अध्यक्ष पार्वतीबाई बारस्कर का कहना है कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा मुझे इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं दी गई है और स्वयं के विवेक से शर्तों को बदलकर निविदा को संपादित किया गया है।
यदि निविदाकर्ता द्वारा टेंडर की शर्तों के अनुसार पूरा भुगतान ऑनलाइन किया गया होता तो नगरपालिका द्वारा जीएसटी की राशि 3 लाख 83 हजार 293 हजार का भुगतान जीएसटी विभाग को संपूर्ण एवं समय पर कर दिया गया होता। शर्त क्रमांक 3 के अनुसार यदि निविदाकर्ता द्वारा देय शुल्क राशि का भुगतान समय पर नहीं किया जाता तो अमानत राशि राजसात कर पुन: निविदा आहुत करने का प्रावधान भी किश्तों में भुगतान प्राप्त करने से समाप्त हो जाएगा।
वर्तमान वर्ष का भुगतान तो किश्तों में लिया ही गया बल्कि आगामी वर्ष 2026-27 एवं 27-28 का भुगतान भी किश्तों में पोस्टडेटेड चैक के माध्यम से लिया गया है। जबकि अनुबंधन निष्पादन सूचना पत्र के अनुसार 25,12,695 रुपए का ऑनलाइन भुगतान, वर्ष 26-27 का 27,63,964 का अग्रिम चैक भुगतान एवं वर्ष 27-28 का 30,40,360 और जीएसटी मिलाकर 83 लाख 17 हजार 19 रुपए का भुगतान नगरपालिका को प्राप्त होना था परंतु सीएमएओ की मर्जी के चलते यह राजस्व कब मिल पाएगा या पूरा मिल पाएगा इसमें संदेह है।





