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कक्ष चाहिए थे आंगनवाड़ी के लिए, गिरा दिया पूरा स्कूल – तोड़ने के पहले मलबा सस्ते में नीलाम

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कक्ष चाहिए थे आंगनवाड़ी के लिए, गिरा दिया पूरा स्कूल – तोड़ने के पहले मलबा सस्ते में नीलाम

घोड़ाडोंगरी (बैतूल):- नगर परिषद क्षेत्र घोड़ाडोंगरी में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एकीकृत बाल विकास परियोजना ने आंगनवाड़ी संचालन हेतु विद्यालय परिसर में केवल एक अतिरिक्त कक्ष की मांग की थी, वहां विभाग ने पूरी स्कूल बिल्डिंग को ही कण्डम घोषित कर गिरा दिया। इसके साथ ही हादसों के डर की आड़ में तीन स्कूल भवनों का मलबा भी तोड़ने के पहले ही मात्र 14,550 रुपए में नीलाम कर दिया गया।

आंगनवाड़ी कक्ष की मांग, लेकिन नजर अंदाज कर गिरा दिया पूरा भवन

प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, परियोजना अधिकारी ने 16 फरवरी 2023 को पत्र लिखकर वार्ड क्रमांक 3, इमली मोहल्ला स्थित आंगनवाड़ी केंद्र की क्षतिग्रस्त छत के चलते बच्चों की सुरक्षा हेतु स्कूल परिसर में एक कक्षा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था।
लेकिन इस मांग को दरकिनार करते हुए, विभाग ने कलेक्टर को भ्रामक जानकारी देकर 26 दिसंबर 2024 को भवन को 40 वर्ष पुराना बताकर कण्डम घोषित कर गिराने की स्वीकृति ले ली।

मलबा कौड़ियों के भाव नीलाम

इसी बीच, विभाग की नीलामी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड क्रमांक 4, 2 और 12 स्थित तीन प्राथमिक स्कूल भवनों को गिराने के पहले ही मलबा कुल ₹14,550 में ठेकेदार को बेच दिया गया। जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि भवनों में लाखों की ईंटें, सागौन के दरवाजे और खिड़कियां मौजूद थीं, जिन्हें औने-पौने दाम पर बेचकर शासन को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

जनता का आरोप – भ्रष्टाचार का साफ खेल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल एक कक्षा की मांग की गई थी, उसे नजर अंदाज करके अधिकारियों ने अपने लाभ के लिए पूरी बिल्डिंग गिराकर शासन के धन की बर्बादी की है जिसके चलते यहां आंगनबाड़ी अब किराए के भवन में संचालित हो रही तोड़े गए स्कूल का मलबा सस्ते में ठेकेदार को तोड़ने के पहले ही बेच दिया गया। यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार का उदाहरण प्रतीत होती है।

जांच और कार्रवाई की मांग

लोगों ने कलेक्टर से मांग की है कि आंगनवाड़ी कक्ष की मांग को दबाकर भवन गिराने और संदिग्ध नीलामी, दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में शासन की संपत्तियों की इस तरह लूट-खसोट न हो सके।

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