Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

हिमाचल में ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट फर्जीबाड़ा, आयुर्वेदिक विभाग के कई डाक्टर शिकंजे में

By
On:

धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्रों को लेकर एक बड़ा फर्जीबाड़ा सामने आया है, जिसने राज्य में हडक़ंप मचा दिया है। विजिलेंस जांच में खुलासा हुआ है कि कई अपात्र व्यक्तियों ने फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली। इनमें से कुछ तो आयुर्वेदिक विभाग में डाक्टर के पद पर तैनात हो गए हैं। इतना ही नहीं, जांच आगे बढ़ी तो अन्य विभागों में भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने आयुर्वेदिक विभाग में मंडी, धर्मशाला, हमीरपुर और बिलासपुर में फर्जी दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप में केस दर्ज कर लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से तीन मामलों को तो स्वीकृति भी मिल चुकी है, जिससे यह साफ है कि जांच की आंच अब तेजी से आगे बढ़ेगी।

यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब एक शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को इस संबंध में शिकायत की। गहन जांच के बाद पता चला कि कुछ अभ्यार्थियों ने डाक्टर बनने के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए न केवल अपनी पारिवारिक आय छिपाई, बल्कि कुछ ऐसे भी थे जो पहले से ही किसी अन्य सरकारी सेवा में कार्यरत थे। यह सीधे तौर पर पात्रता मानदंडों का उल्लंघन है, क्योंकि यह लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को दिया जा सकता है, जिनके परिवार में सरकारी सेवा में कोई नहीं हैं और जिनकी पारिवारिक आय निर्धारित सीमा से कम है। उल्लेखनीय है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद उम्मीदवार केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं। इस फजीबाड़े ने इस महत्त्वपूर्ण आरक्षण प्रणाली की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विजिलेंस की यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि इस तरह के कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी गलत प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

अधिकारी भी जांच के दायरे में

इस पूरे प्रकरण में केवल ये डाक्टर ही नहीं, बल्कि उन अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ गई है, जिन्होंने आंखें मूंदकर ये फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी किए। विजिलेंस इस जांच को आगे बढ़ा रही है और ऐसी संभावना है कि आने वाले समय में प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी भी कानून के शिकंजे में आ सकते हैं। जानकारी के अनुसार फर्जीबाड़े के इस मामले में सबसे ज्यादा जिला कांगड़ा में पांच, मंडी में चार, हमीरपुर में चार और बिलासपुर में एक केस दर्ज किया गया है। इन आयुर्वेदिक विभाग के कर्मियों की तैनाती 2022 में बैचवाइज आधार पर हुई थी।

For Feedback - feedback@example.com
Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News