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6G In India: 6G की रेस में चीन सबसे आगे, भारत कितनी दूरी पर? जानिए पूरी सच्चाई

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6G In India: मोबाइल इंटरनेट की दुनिया में अब अगला बड़ा धमाका 6G नेटवर्क को माना जा रहा है। अभी देश में 5G पूरी तरह फैला भी नहीं है, लेकिन चीन ने 6G की रेस में लंबी छलांग लगा दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत इस दौड़ में कहां खड़ा है, चीन से कितना पीछे है और आम लोगों की जिंदगी में 6G क्या बदलाव लाएगा।

6G क्या है? आसान भाषा में समझिए

6G यानी मोबाइल नेटवर्क की अगली पीढ़ी। अगर 5G ने हमें तेज इंटरनेट दिया, तो 6G बिजली से भी तेज स्पीड देने का वादा करता है। इसमें डेटा भेजने और पाने में लगभग जीरो देरी (Latency) होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, IoT, सैटेलाइट नेटवर्क और क्लाउड – सब कुछ मिलकर काम करेगा। मतलब इंटरनेट इतना फुर्तीला होगा कि रियल टाइम में हर काम मुमकिन हो जाएगा।

6G की रेस में चीन कितना आगे निकल चुका है?

चीन इस वक्त 6G टेक्नोलॉजी में सबसे आगे माना जा रहा है। उसने 6G ट्रायल का पहला चरण पूरा कर लिया है और दूसरा चरण भी शुरू कर दिया है। चीन ने 6G टेस्टिंग के लिए सैटेलाइट तक लॉन्च कर दिए हैं और टेराहर्ट्ज वेव्स पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6G से जुड़े करीब 40% ग्लोबल पेटेंट चीन के पास हैं। टेक्नोलॉजी और रिसर्च के मामले में चीन भारत से लगभग 2-3 साल आगे है।

भारत 6G के लिए कितना तैयार है?

भारत भी इस रेस में पीछे रहने के मूड में नहीं है। सरकार ने ‘भारत 6G मिशन’ और ‘भारत 6G विज़न’ लॉन्च किया है। लक्ष्य है कि 2030 तक देश में 6G सर्विस शुरू हो जाए। भारत का फोकस देसी टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर, Open RAN और किफायती नेटवर्क पर है। पेटेंट्स में भारत पीछे जरूर है, लेकिन तेजी से पकड़ बना रहा है।

6G आएगा तो आम आदमी की जिंदगी कैसे बदलेगी?

6G के आने से इंटरनेट स्पीड हजार गुना तक बढ़ सकती है। भारी फाइलें सेकेंड्स में डाउनलोड होंगी। डॉक्टर दूर बैठकर रोबोटिक सर्जरी कर पाएंगे। स्मार्ट सिटी, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और मेटावर्स जैसे कॉन्सेप्ट हकीकत बनेंगे। गांव-देहात तक सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचेगा। कुल मिलाकर जिंदगी और काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

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भारत के लिए 6G क्यों है गेम चेंजर?

भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है। अगर भारत समय रहते 6G में महारत हासिल कर लेता है, तो वह सिर्फ यूज़र नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी लीडर बन सकता है। इससे स्टार्टअप्स, हेल्थकेयर, एजुकेशन और इंडस्ट्री 4.0 को जबरदस्त फायदा होगा।

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