1x Betting Case: देश में गैरकानूनी ऑनलाइन बेटिंग ऐप 1xBet से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने कई बड़े नामों पर कार्रवाई की है। युवराज सिंह, उर्वशी रौतेला, सोनू सूद जैसे सेलिब्रिटीज की करोड़ों की संपत्तियां अटैच की गई हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि ED आखिर जब्त की गई संपत्ति का करती क्या है? क्या उसे बेच देती है या बाद में लौटा देती है?
प्रॉपर्टी अटैचमेंट का मतलब क्या होता है?
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि प्रॉपर्टी अटैच होना सीधी जब्ती नहीं होती। जब ED किसी संपत्ति को अटैच करती है, तो इसका मतलब है कि वह उस संपत्ति को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मानकर जांच के दायरे में लाती है। यह कार्रवाई PMLA कानून के तहत होती है।
180 दिन की जांच अवधि क्यों होती है?
ED जब किसी की संपत्ति अटैच करती है, तो उसके पास 180 दिन का समय होता है। इस दौरान संपत्ति मालिक उसी की रहती है, लेकिन वह उसे बेच नहीं सकता, गिरवी नहीं रख सकता। अगर वह घर है तो उसमें रह सकता है, लेकिन कोई सौदा नहीं कर सकता। इस समय ED सबूत जुटाती है कि संपत्ति काले धन से खरीदी गई है या नहीं।
जांच में क्या साबित करना होता है ED को?
इन 180 दिनों के भीतर ED को अजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने यह साबित करना होता है कि संपत्ति मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी है। अगर ED सबूत देने में नाकाम रहती है, तो उसे संपत्ति लौटानी पड़ती है। यानी हर अटैचमेंट का मतलब स्थायी जब्ती नहीं होता।
कब होती है असली जब्ती और नीलामी?
अगर जांच में यह साफ हो जाए कि संपत्ति अवैध कमाई से खरीदी गई है, तो अदालत अटैचमेंट को कन्फर्म कर देती है। इसके बाद ED संपत्ति का फिजिकल कब्जा ले लेती है। जब मामला PMLA कोर्ट में साबित हो जाता है, तब जाकर उस संपत्ति की नीलामी होती है।
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नीलामी के बाद पैसा कहां जाता है?
जब जब्त की गई संपत्ति को बेचा जाता है, तो उससे मिलने वाली रकम सरकारी खजाने में जमा होती है। यह पैसा आरोपी को वापस नहीं मिलता। हालांकि, अगर आरोपी कोर्ट से बरी हो जाए, तो उसे उसकी संपत्ति वापस मिल सकती है।





