₹52 लाख की नौकरी छोड़ मोमो से करोड़ों कमाने का सपना
गुरुग्राम के रहने वाले साकेत सौरभ ने वो कर दिखाया है, जो लाखों लोग सिर्फ़ सोचते हैं। साल 2023 में साकेत ने अपनी ₹52 लाख सालाना पैकेज वाली कॉरपोरेट नौकरी को अलविदा कहा और एक छोटा-सा मोमो बिज़नेस शुरू किया। उनका मानना था कि भारत में मोमो तो हर जगह मिलते हैं, लेकिन कोई दमदार ब्रांड नहीं है। इसी सोच से जन्म हुआ ‘द मोमो माफिया’ का, जो आज करोड़ों का कारोबार कर रहा है।
छोटी सी ठेली से शुरू हुआ बड़ा खेल
साकेत की शुरुआत किसी फाइव-स्टार किचन से नहीं, बल्कि गुरुग्राम के इन्फोटेक इलाके की एक छोटी सी ठेली से हुई। पहले वो अपनी बहन और जीजा के साथ एक कैफे चला रहे थे, जहां मोमो सिर्फ़ एक एक्सपेरिमेंट थे। लेकिन यही एक्सपेरिमेंट रोज़ ₹10,000–₹12,000 की बिक्री करने लगा। ऑफिस से निकलते लोग जब बिज़नेस में दिलचस्पी दिखाने लगे, तब साकेत के दिमाग में फ्रेंचाइज़ी मॉडल का आइडिया आया।
फ्रेंचाइज़ी मॉडल ने बदली किस्मत
आज द मोमो माफिया सिर्फ़ एक ठेली नहीं, बल्कि एक मजबूत नेटवर्क बन चुका है। साकेत के पास अब 40 से ज़्यादा मोमो कार्ट, 20 छोटे आउटलेट और 2 बड़े रेस्टोरेंट हैं। उनका बिज़नेस सात राज्यों तक फैल चुका है। साकेत ने समझ लिया था कि स्केल करने के लिए सिस्टम बनाना ज़रूरी है, सिर्फ़ मेहनत नहीं।
मुश्किलें आईं, लेकिन हौसला नहीं टूटा
शुरुआत में रास्ता आसान नहीं था। कभी प्रशासन की कार्रवाई, कभी बारिश और मौसम की मार—ठेली वाला बिज़नेस टिकाऊ नहीं लग रहा था। तब साकेत ने CSR यानी Cart Service Restaurant मॉडल लॉन्च किया, जो ठेली और आउटलेट का देसी जुगाड़ था। मेहनत रंग लाई—पहले साल में ₹16 लाख का टर्नओवर हुआ। FY 2023-24 में बिज़नेस ₹2.2 करोड़ तक पहुंचा और अब ₹3 करोड़ का टारगेट है।
नौकरी छोड़ने वालों को साकेत की देसी सलाह
आज साकेत के बिज़नेस में 5 पार्टनर हैं और ब्रांड तेज़ी से बढ़ रहा है। उनका इंस्टाग्राम वीडियो, जिसमें उन्होंने ₹50 लाख की नौकरी छोड़ने की बात कही, 3 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। साकेत साफ कहते हैं—“अगर बड़ा ब्रांड बनाना है तो सिर्फ़ ठेली मत लगाओ, प्रॉपर आउटलेट से शुरुआत करो। ठेली से गुज़ारा हो सकता है, लेकिन ब्रांड आउटलेट से बनता है।”
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