Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

होली के रीति-रिवाज: क्यों सास-बहू साथ नहीं देखतीं होलिका दहन? जानिए पहली होली से जुड़ी मान्यताएं

By
On:

भारत में होली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाने वाली यह रंगों की होली सिर्फ मस्ती का नहीं, बल्कि परंपराओं और मान्यताओं का भी त्योहार है। खासकर नई बहू की पहली होली को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं। कहीं उसे मायके भेज दिया जाता है तो कहीं ससुराल में ही धूम मचती है। आइए जानते हैं इन दिलचस्प मान्यताओं के पीछे की वजह।

नई बहू की पहली होली मायके में क्यों?

उत्तर भारत के कई हिस्सों जैसे पंजाब और हरियाणा में यह परंपरा है कि शादी के बाद बहू की पहली होली उसके मायके में मनाई जाए। माना जाता है कि ससुराल में पहली होली मनाना शुभ नहीं होता। इसलिए ससुराल वाले खुद ही प्यार से बेटी को मायके भेज देते हैं। इससे रिश्तों में मिठास बनी रहती है और कोई अनहोनी का डर भी नहीं रहता। गांव-देहात में आज भी लोग इस रिवाज को बड़े मान से निभाते हैं।

सास-बहू साथ में क्यों नहीं देखतीं होलिका दहन?

Holika Dahan को लेकर एक खास मान्यता है कि नई बहू और सास अगर साथ में होलिका दहन देखें तो उनके रिश्ते में खटास आ सकती है। यह मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है। बुजुर्गों का कहना है कि आग के इस पर्व में नई बहू की मौजूदगी कुछ परिवारों में अशुभ मानी जाती है। इसलिए एहतियात के तौर पर दोनों को अलग रखा जाता है ताकि घर में प्यार बना रहे।

होलिका की कथा और उससे जुड़ी मान्यता

धार्मिक कथा के अनुसार Holika, जो हिरण्यकश्यप की बहन थी, अग्नि में बैठी थी। उसे वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। इसी कारण होलिका की अग्नि को “होलिका की चिता” भी कहा जाता है। कई लोग मानते हैं कि नवविवाहित बहू का इस चिता को देखना अच्छा संकेत नहीं है।

रिश्तों में अपनापन बनाए रखने की सोच

शादी के बाद नई बहू पर ढेर सारी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। नए घर, नए लोग और नए नियम—सब कुछ नया होता है। ऐसे में होली जैसे खुलकर खेलने वाले त्योहार में असहजता हो सकती है। मायके में वह खुलकर रंग खेल सकती है, हंसी-मजाक कर सकती है और अपने पति के साथ बेफिक्र होकर त्योहार मना सकती है। यही सोच इस परंपरा के पीछे मानी जाती है।

हर जगह नहीं निभाई जाती ये परंपरा

यह जानना भी जरूरी है कि यह रिवाज पूरे भारत में नहीं है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में नई बहू ससुराल में ही पहली होली मनाती है। वहां इसे शुभ माना जाता है। इसलिए इन मान्यताओं को पूरे देश पर लागू करना सही नहीं होगा।

आखिर में, होली प्यार, अपनापन और खुशियों का त्योहार है। चाहे मायका हो या ससुराल, रंगों की ये मस्ती रिश्तों में मिठास ही घोलती है।

Read Also :- आयुष शर्मा को विदेश से मिली धमकी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम आया सामने

For Feedback - feedback@example.com
Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News