ट्रेन का सफर और अचानक सांप का सामना
सोचिए आप गोवा से ट्रेन पकड़कर खिड़की के पास बैठे हैं, हरियाली देख रहे हैं और तभी आपकी नजर पास ही कुंडली मारकर बैठे किंग कोबरा पर पड़ती है। दिल की धड़कन तेज़ होना लाज़मी है। हाल के दिनों में ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें किंग कोबरा ट्रेन, रेलवे ट्रैक और यहां तक कि भीड़भाड़ वाले स्टेशन के पास दिखे हैं। यह नज़ारा किसी को भी डराने के लिए काफी है।
पश्चिमी घाट से रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंच रहे हैं किंग कोबरा?
पश्चिमी घाट किंग कोबरा का प्राकृतिक घर है, लेकिन जंगलों की कटाई और रेलवे लाइनों के विस्तार ने इनके रास्ते बदल दिए हैं। जब रहने की जगह और भोजन कम होता है, तो ये सांप नई जगहों की तलाश में भटकते हैं। कई बार ये इंसानों की दुनिया में आ जाते हैं, जहां न उन्हें सुरक्षा मिलती है और न ही शांति।
22 साल की स्टडी ने खोली पोल
जर्नल Biotropica में छपी एक स्टडी के मुताबिक 2002 से 2024 के बीच गोवा में किंग कोबरा के 47 पुख्ता मामले सामने आए। इनमें से 18 उत्तर गोवा और 29 दक्षिण गोवा से थे। सबसे हैरानी की बात यह रही कि 5 मामले सीधे रेलवे लाइन के आसपास दर्ज किए गए। 2017, 2019 और 2023 में ट्रेन से किंग कोबरा रेस्क्यू किए जाने की घटनाएं सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं।
क्या सच में ट्रेन से सफर कर रहे हैं सांप?
रिसर्चर्स का मानना है कि किंग कोबरा अक्सर मालगाड़ियों पर चढ़ जाते हैं, खासकर तब जब वे चूहों का पीछा कर रहे होते हैं या छांव ढूंढ रहे होते हैं। ट्रेन चल पड़ती है और सांप मीलों दूर किसी ऐसी जगह उतर जाता है, जो उसके लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं होती। रेलवे लाइन सांपों के लिए सड़क से कम खतरनाक होती है, इसलिए वे बच जाते हैं, लेकिन गलत जगह पहुंच जाते हैं।
इंसान और सांप—दोनों के लिए खतरा
अचानक नई जगह पर पहुंचा किंग कोबरा घबराया हुआ होता है। लोग डर के मारे उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि सांप का जहर बेहद खतरनाक होता है। एक ही काट जानलेवा साबित हो सकता है। यह स्थिति न इंसानों के लिए सुरक्षित है और न ही इस दुर्लभ प्रजाति के लिए। जंगलों का संरक्षण और सुरक्षित कॉरिडोर ही इसका एकमात्र समाधान है।





