रूस-यूक्रेन जंग को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। पुतिन ने साफ कहा है कि यूक्रेन में रूसी सेना तेजी से आगे बढ़ रही है और अब अपने तय किए गए लक्ष्यों के काफी करीब पहुंच चुकी है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है।
पुतिन के बयान से यूक्रेन से लेकर अमेरिका तक हलचल
पुतिन का यह बयान सामने आते ही यूक्रेन, यूरोप और अमेरिका में बेचैनी बढ़ गई है। खासतौर पर यूक्रेन के लिए यह संकेत बेहद गंभीर माना जा रहा है। नाटो महासचिव मार्क रुटे ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर शांति समझौते के बाद रूस ने दोबारा हमला किया, तो उसे करारा जवाब मिलेगा। ऐसे माहौल में पुतिन का यह दावा तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
यूरोप क्यों है पुतिन की बातों पर नजर
यूरोप के देश इस साल पुतिन के हर बयान को बेहद ध्यान से सुन रहे हैं। रूसी सेना भले ही धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हो, लेकिन उसकी रणनीतिक पकड़ मजबूत होती दिख रही है। पुतिन ने अपने वार्षिक लाइव कार्यक्रम में दावा किया कि रूसी सेना ने एक अहम रणनीतिक इलाका पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया है और साल के अंत तक और प्रगति होगी। यह बयान रूस के भीतर भी उसकी ताकत को दिखाने की कोशिश माना जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की अमेरिकी कोशिशें
फरवरी 2022 से शुरू हुए इस युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश किए गए शांति प्लान पर बातचीत चल रही है, लेकिन रूस और यूक्रेन की शर्तें एक-दूसरे से बिल्कुल उलट हैं। पुतिन ने दोहराया है कि रूस शांति चाहता है, लेकिन केवल तभी जब युद्ध की “जड़ समस्याओं” का समाधान हो। रूस की यह लाइन पश्चिमी देशों को रास नहीं आ रही।
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आखिर रूस चाहता क्या है
रूस की मांगें पहले से ही काफी सख्त हैं। पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन के चार बड़े इलाके, जिन पर रूसी सेना का कब्जा है, उन्हें रूस का हिस्सा माना जाए। इसके अलावा 2014 में कब्जाए गए क्रीमिया प्रायद्वीप को भी रूस का ही क्षेत्र स्वीकार किया जाए। इतना ही नहीं, पुतिन यूक्रेनी सेना से कुछ ऐसे इलाकों से पीछे हटने की मांग कर रहे हैं, जहां अभी रूस का कब्जा नहीं है। यूक्रेन पहले ही इन मांगों को सिरे से खारिज कर चुका है।
कुल मिलाकर, पुतिन का यह बयान साफ इशारा करता है कि रूस फिलहाल दबाव में झुकने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह जंग किस मोड़ पर पहुंचेगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।




