मोशन सिकनेस यानी सफर में जी मिचलाना, चक्कर आना या उल्टी होना। कई लोगों को जैसे ही कार, बस या ट्रेन चलती है, सिर भारी लगने लगता है, पसीना आने लगता है और मन घबराने लगता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कम यात्रा करने वालों में यह दिक्कत ज्यादा देखी जाती है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में यह समस्या आम हो गई है, लेकिन इसे हल्के में लेना ठीक नहीं।
मोशन सिकनेस क्यों होती है?
जब शरीर के अलग-अलग हिस्से दिमाग को अलग-अलग संकेत भेजते हैं, तब मोशन सिकनेस होती है। आंखें गाड़ी के अंदर की चीज़ें स्थिर देखती हैं, लेकिन कान और शरीर की नसें चलने का अहसास कराती हैं। इस तालमेल की कमी से दिमाग कन्फ्यूज़ हो जाता है और उल्टी, चक्कर, सिरदर्द जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
सफर के दौरान नजर कहां रखें?
यात्रा करते समय अपनी नजर किसी दूर की स्थिर चीज़ पर टिकाकर रखें, जैसे सड़क, पहाड़ या क्षितिज। मोबाइल, किताब या लैपटॉप देखने से बचें क्योंकि इससे आंखों और दिमाग का संतुलन और बिगड़ जाता है।
सही तरीके से बैठना भी जरूरी
सीट पर आराम से टिक कर बैठें, सिर को ज्यादा हिलाने-डुलाने से बचें। अगर संभव हो तो खिड़की के पास या आगे की सीट पर बैठना बेहतर रहता है।
खाने-पीने में क्या करें, क्या न करें?
सफर से पहले बहुत भारी, तला-भुना या मसालेदार खाना न खाएं। न ही बिल्कुल खाली पेट यात्रा करें। हल्का भोजन जैसे फल, खिचड़ी या टोस्ट लेना सही रहता है।
अदरक है देसी रामबाण
अदरक मोशन सिकनेस में बहुत कारगर माना जाता है। आप अदरक की चाय, कैंडी या गोली ले सकते हैं। यह पेट को शांत करता है और उल्टी की भावना कम करता है।
च्युइंग गम और टॉफी का कमाल
सफर के दौरान च्युइंग गम चबाने या इलायची, सौंफ जैसी चीज़ें मुंह में रखने से भी जी मिचलाना कम होता है। इससे लार बनती रहती है और पेट को राहत मिलती है।
दवा कब लें?
अगर हर बार सफर में यह समस्या बहुत ज्यादा होती है, तो डॉक्टर की सलाह से दवा ली जा सकती है। खुद से दवा लेना सही नहीं है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
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