तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाले कार्तिक नाम के जबरा फैन ने अपने घर में ही रजनीकांत का मंदिर बना डाला। जी हां, पूरा का पूरा मंदिर! इस मंदिर में रजनीकांत की बड़ी-बड़ी मूर्तियां और हजारों तस्वीरें लगी हुई हैं। कार्तिक का कहना है कि “थलाइवा ही मेरे भगवान हैं।” उनके लिए रजनीकांत सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक हैं।
महाशिवरात्रि पर शिव रूप में पूजा
महाशिवरात्रि के मौके पर कार्तिक ने कुछ अलग ही कर डाला। उन्होंने रजनीकांत की फिल्म Uzhaippali की एक तस्वीर निकाली, जिसमें सुपरस्टार भगवान शिव के रूप में नजर आ रहे हैं। उसी तस्वीर को मंदिर में स्थापित कर विधि-विधान से पूजा शुरू कर दी।
दूध, पंचामृत और जल से बाकायदा जलाभिषेक किया गया। जैसे शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है, वैसे ही उन्होंने रजनीकांत की तस्वीर पर पानी अर्पित किया। वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर मचा बवाल
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोग बोले – “ये है सच्ची फैनगिरी, दिल से इज्जत।” तो कुछ लोगों ने इसे हद पार करना बताया। उनका कहना था कि किसी इंसान की तस्वीर को भगवान शिव की तरह पूजना सही नहीं है।
फिर क्या था, ट्विटर और फेसबुक पर जमकर बहस शुरू हो गई। कोई इसे भक्ति बता रहा है तो कोई अंधभक्ति।
रजनीकांत की फैन फॉलोइंग का जलवा
ये पहली बार नहीं है जब रजनीकांत के फैंस ने कुछ अनोखा किया हो। पहले भी उनके नाम पर मंदिर बन चुके हैं और उनकी फिल्म रिलीज पर दूध से पोस्टर नहलाने की परंपरा रही है। साउथ में उनकी दीवानगी किसी त्योहार से कम नहीं होती।
उनकी सादगी, मेहनत और जमीन से जुड़ा स्वभाव ही उन्हें लोगों के दिलों में भगवान जैसा दर्जा दिलाता है।
भक्ति या अति-भक्ति?
अब सवाल ये उठता है – क्या ये सच्ची श्रद्धा है या फिर अति-भक्ति? हमारे देश में हीरो वर्शिप कोई नई बात नहीं। लोग अपने पसंदीदा सितारों को सिर-आंखों पर बिठाते हैं।
कार्तिक के इस कदम ने फिर साबित कर दिया कि रजनीकांत सिर्फ स्टार नहीं, एक भावना हैं। चाहे लोग इसे सराहें या आलोचना करें, लेकिन इतना तो तय है कि थलाइवा की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आने वाली।
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