सर्दियों का मौसम आते ही बाजारों में एक फल सबसे ज़्यादा लोगों को लुभाता है — स्ट्रॉबेरी। इसकी लाल चमक, हल्की खटास और मीठा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को दीवाना बना देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में इतनी ज़्यादा स्ट्रॉबेरी आखिर आती कहाँ से है? बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत का एक छोटा-सा हिल स्टेशन देश की ज़्यादातर स्ट्रॉबेरी उगाता है।
कहां है भारत की स्ट्रॉबेरी सिटी?
भारत की स्ट्रॉबेरी सिटी महाबलेश्वर है, जो महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में स्थित है। यह खूबसूरत पहाड़ी इलाका देश की लगभग 80% स्ट्रॉबेरी का उत्पादन करता है। ठंडी रातें, हल्की धूप और साफ मौसम स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए एकदम परफेक्ट हैं। यहां की लाल लेटराइट मिट्टी स्ट्रॉबेरी को बेहतरीन रंग और स्वाद देती है, जिसकी वजह से महाबलेश्वर की स्ट्रॉबेरी पूरे देश में मशहूर है।
मौसम और मिट्टी का जादू
महाबलेश्वर में अच्छी बारिश होती है, जिससे मिट्टी में भरपूर नमी बनी रहती है। यही वजह है कि यहां उगने वाली स्ट्रॉबेरी ज्यादा रसीली, मीठी और टिकाऊ होती है। ठंडा मौसम फल को धीरे-धीरे पकने का मौका देता है, जिससे उसका स्वाद और खुशबू दोनों लाजवाब हो जाते हैं। यही कारण है कि यहां की स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब नहीं होती।
यहां उगाई जाने वाली स्ट्रॉबेरी की किस्में
महाबलेश्वर में कई तरह की स्ट्रॉबेरी उगाई जाती हैं।
चैंडलर किस्म अपने बड़े साइज और जूसी स्वाद के लिए जानी जाती है।
स्वीट चार्ली जल्दी तैयार होने वाली और बेहद मीठी होती है।
वहीं कैमरोज़ा किस्म लंबी दूरी तक भेजने के लिए सबसे बढ़िया मानी जाती है क्योंकि यह जल्दी खराब नहीं होती।
आधुनिक खेती और किसानों की मेहनत
यहां के किसान आधुनिक तकनीक, ड्रिप इरिगेशन और प्लास्टिक मल्चिंग जैसी विधियों का इस्तेमाल करते हैं। कई पीढ़ियों से चली आ रही खेती की समझ ने उत्पादन को और बेहतर बना दिया है। इससे किसानों की आमदनी भी अच्छी होती है और क्वालिटी भी बनी रहती है।
देश-विदेश तक पहुंचती स्ट्रॉबेरी
सितंबर-अक्टूबर में स्ट्रॉबेरी की पौध लगाई जाती है और दिसंबर से मार्च तक इसकी तुड़ाई होती है। महाबलेश्वर की स्ट्रॉबेरी सीधे मुंबई, पुणे, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में भेजी जाती है। इतना ही नहीं, जैम, पल्प और फ्रोजन फॉर्म में यह स्ट्रॉबेरी विदेशों तक भी एक्सपोर्ट होती है।
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