आजकल ज़्यादातर लोग अपने सोने-चांदी के गहने और कीमती सामान बैंक लॉकर में रखते हैं। हमें लगता है कि बैंक लॉकर मतलब पूरी तरह से सुरक्षित जगह। लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है। बैंक आपका बीमा कंपनी नहीं है, वह सिर्फ लॉकर की जगह किराये पर देता है। हाल ही में लखनऊ में एक बैंक में 42 लॉकर तोड़कर चोरी हुई, जिसमें कई ग्राहकों को पूरा पैसा अभी तक नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठता है – अगर बैंक लॉकर से सोना चोरी हो जाए तो क्या बैंक पूरा मुआवज़ा देता है? आइए आसान देसी भाषा में समझते हैं।
बैंक लॉकर की जिम्मेदारी क्या होती है?
RBI के नियमों के मुताबिक बैंक की जिम्मेदारी तभी बनती है जब चोरी या नुकसान बैंक की लापरवाही या किसी कर्मचारी की धोखाधड़ी की वजह से हुआ हो। यानी अगर बैंक की गलती साबित होती है, तभी मुआवज़ा मिलेगा। बैंक खुद को सिर्फ “लॉकर देने वाला” मानता है, न कि आपके गहनों का रखवाला।
बैंक कितना मुआवज़ा देता है?
अगर चोरी, डकैती, आग या बिल्डिंग गिरने जैसी घटना बैंक की लापरवाही से हुई है, तो बैंक आपको सालाना लॉकर किराये का 100 गुना तक मुआवज़ा देगा।
मान लीजिए आपका लॉकर किराया ₹3,000 सालाना है, तो आपको अधिकतम ₹3,00,000 मिलेंगे। चाहे आपके गहनों की कीमत 10 लाख ही क्यों न हो, बैंक इससे ज़्यादा नहीं देगा। यही असली खेल है, जो ज़्यादातर लोगों को पता नहीं होता।
प्राकृतिक आपदा में क्या होगा?
अगर नुकसान भूकंप, बाढ़, बिजली गिरने या तूफान जैसी प्राकृतिक आपदा (Act of God) से होता है, तो बैंक एक भी रुपया देने के लिए बाध्य नहीं है। RBI का कहना है कि ऐसी घटनाओं पर बैंक का कंट्रोल नहीं होता। इसलिए यहां ग्राहक को खुद संभलकर रहना पड़ेगा।
ग्राहकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
अगर आप लॉकर में भारी-भरकम गहने रखते हैं, तो सिर्फ बैंक पर भरोसा मत करिए। सबसे पहले लॉकर का अलग से बीमा (Locker Insurance) करवा लीजिए। आजकल कई बीमा कंपनियां सस्ती पॉलिसी देती हैं जो चोरी और प्राकृतिक आपदा दोनों को कवर करती हैं।
जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड कैसे रखें?
हमेशा अपने गहनों की लिस्ट बनाकर रखें। उनकी फोटो खींचकर मोबाइल और किसी सुरक्षित जगह पर सेव करें। खरीद की रसीद और वजन का बिल संभालकर रखें। जब भी लॉकर खोलें, बैंक के रजिस्टर में एंट्री जरूर करवाएं और यह देख लें कि लॉकर ठीक से बंद हुआ है या नहीं।
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